मंगलवार, 28 दिसम्बर 2010

हताशा ........वीना

कितना हताश था
वह ऑटो चालक
टूटा-सा, बिखरा-सा
पैसे कमाने की धुन में
भूल गया था भूख
भूखा पेट, वीरान आंखें
अनर्थ की आशंका
सुबह से 
इकट्ठा कर रहा था
रुपये
खुद मंजिल से दूर
पहुंचा रहा था दूसरों को
उनकी मंजिलों तक
गिड़गिड़ाया बहुतों के आगे
डॉक्टरों से भी मिन्नत की
मौत को हर पल 
देख रहा था पास आते
अपनी गुमसुम आंखों से
उसे नहीं मिल पा रहा था खून
अपने बेटे के लिए
जिसे था कैंसर
उसके पास रुपये नहीं थे
लोगों के पास इंसानियत

बुधवार, 22 दिसम्बर 2010

प्यार का दामन....वीना

मन को बांधो 
भावनाएं साथ चलेंगी
ह्रदय भरेगा उड़ान
रोशनी के
किनारे होंगे
दीपों की राह पर
हौसलों के कदम होंगे
किरणों के धागे
बांधेगे नया जीवन
चांदनी को पीते जाओ
तृप्ति की बूंद तक
कण-कण में
रचते-बसते हुए
मिल जाए कहीं अगर
प्यार का दामन
दो दिशाएं भी
साथ चलेंगी

बुधवार, 1 दिसम्बर 2010

अंजाम-ए-मुहब्बत क्या होगा.....वीना

अंजाम-ए-मुहब्बत क्या होगा, जब दिल ही हम यूं लगा बैठे
अब  आगे  न  जाने क्या  होगा,  हम ऐसी  नादानी कर बैठे


शम्मा ही चली खुद जलने को, परवाने को तोहमत क्यूं दें हम
गुस्ताखी करी खुद शम्मा ने,  परवाने को क्यूं तरसा बैठे


वादों के तसव्वुर में खोकर, यादों को सजाया है हमने
यादें  ही तो  हैं  जीवन  में, यादों  पर हम भी  जी  बैठे


इश्क ईमान है इश्क अरमान है इश्क में हम सब बस इंसान हैं
इश्क में वीना ने जो सजदा किया ऐ खुदा हम तुझको भुला बैठे