रविवार, 11 नवंबर 2007

चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

2 टिप्‍पणियां:

Talat Irfani ने कहा…

Veena जी,
तलत साहेब की ग़ज़लों पर टिपण्णी करने के लिए धन्यवाद। असल में तलत साहिब इस दुनिया में नही है। वो तो हमें लगभग चार बरस पहले ही छोड़ कर जा चुके हैं। मैं उनका बेटा, सुमित वशिष्ट उनका ब्लॉग मानगे करता हूँ। मेरे पिता की शायरी की सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।
सुमित वशिष्ट
किशोरी निवास,
लोंग्वूद
शिमला- 171001
मोबाइल : 9418065001

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

इरफानी जी,
मुझे पता है और उस आवाज के खो जाने का गम भी है। माता-पिता की विरासत को संभालना, सहेजना बच्चों का कर्तव्य है। काफी प्रयास के बाद आखिर मुझे उनका गीत मिल ही गया। धन्यवाद