इसी घर के
किसी कोने में
उस मां ने
झेली होगी
प्रसव पीड़ा
नौ महीने
पेट में रखने के बाद
पाला होगा
लाड़-प्यार से
आंचल फाड़कर
ढांपा होगा अपने लाल को
सिमटते हुए
गुजारी होंगी
रातें उसने
दूध की जगह
पिलाया होगा
अपना लहू
निचुड़ गईं होंगी
छातियां उसकी
क्षीण हो गई होगी
काया उसकी
निवाले निकालकर मुंह से
खिलाए होंगे उसे
जो बन गया है नाग
अपनी ही आस्तीन का
फन फैलाए बैठा है
डसने को
उसकी आशाएं
सपने
और
उसका बुढ़ापा
किसी कोने में
उस मां ने
झेली होगी
प्रसव पीड़ा
नौ महीने
पेट में रखने के बाद
पाला होगा
लाड़-प्यार से
आंचल फाड़कर
ढांपा होगा अपने लाल को
सिमटते हुए
गुजारी होंगी
रातें उसने
दूध की जगह
पिलाया होगा
अपना लहू
निचुड़ गईं होंगी
छातियां उसकी
क्षीण हो गई होगी
काया उसकी
निवाले निकालकर मुंह से
खिलाए होंगे उसे
जो बन गया है नाग
अपनी ही आस्तीन का
फन फैलाए बैठा है
डसने को
उसकी आशाएं
सपने
और
उसका बुढ़ापा