गुरुवार, 21 अक्टूबर 2010
मेरे बेटे का अभी ........वीना
सभी ब्लॉगर मित्रों को देर से ही सही दशहरा और दुर्गा पूजा उत्सव की बधाई। अष्टमी को मेरे बेटे का ऑपरेशन था इसलिए न ही मैं कुछ लिख पाई और नहीं आप सबको बधाई ही दे पाई। जब तक वो पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता मैं शायद ही कुछ लिख पाऊं और आप सबकी सुंदर और अच्छी रचनाएं पढ़ पाऊं। उसके ठीक होते ही मैं पुन: सक्रिय होऊंगी....सादर...
सोमवार, 4 अक्टूबर 2010
दिल का दीवानापन............वीना
अब मैं आपको कुछ गीत और गज़ल पढ़वाऊंगी जिन्हे मैने मंच पर पढ़ा.....
दिल का दीवानापन
मत पूछ ऐ सनम
ये हो चुका है तेरा
तेरा है मेरा मन
राह-ए-वफा पे अब से
पहले न चले थे
पीछे न कभी आएंगे
बढ़ते हुए कदम
यूं अब जो मिले हैं तो
हम मिलते ही रहेंगे
टूटे न कभी तेरे-मेरे
प्यार की सरगम
फुर्सत के ये लम्हे हैं
मिले न मिलें कभी
दो-चार घड़ी और हैं
क्यूं दूर रहें हम
अब जिंदगी की राह में
अकेले नहीं हो तुम
वीना तो तेरी हो चुकी है
ऐ मेरे हमदम
दिल का दीवानापन
मत पूछ ऐ सनम
ये हो चुका है तेरा
तेरा है मेरा मन
राह-ए-वफा पे अब से
पहले न चले थे
पीछे न कभी आएंगे
बढ़ते हुए कदम
यूं अब जो मिले हैं तो
हम मिलते ही रहेंगे
टूटे न कभी तेरे-मेरे
प्यार की सरगम
फुर्सत के ये लम्हे हैं
मिले न मिलें कभी
दो-चार घड़ी और हैं
क्यूं दूर रहें हम
अब जिंदगी की राह में
अकेले नहीं हो तुम
वीना तो तेरी हो चुकी है
ऐ मेरे हमदम
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