कुछ अनुभव, कुछ अहसास, कुछ शब्द, कुछ चित्र
अल्हड़पन
वक्त के साथ जाने कहां खो गया
तेरा अमड़ेलापन और मेरा शहतूती अल्हड़पन
मन की गौरैया भी जाने कहां उड़ गई
छौने दहशत में हैं
कास से नहीं लहराते हम
दूब से नहीं तने हम
आओ फिर से बो दें
चाहत के बीज
पीछे वाले उजड़े जंगल में
वीना श्रीवास्तव
18.1.21