ब्लॉग लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
ब्लॉग लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 15 जनवरी 2011

कुछ ब्लॉगरों के तरीके........वीना

आज मैं कोई रचना नहीं पोस्ट कर रही हूं बल्कि  इस ब्लॉग जगत को लेकर कुछ और विचार आपसे बांटना चाहती हूं...। हालांकि मैंने काफी पहले ब्लॉग बनाया था और बनाकर कुछ खास पोस्ट नहीं किया....मगर पांच-छ: महीने पहले ही सक्रिय हुई हूं...यानि दोबारा ब्लॉग जगत से जुड़ी हूं...मुझे कुछ बहुत अच्छे दोस्त मिले, कुछ रिश्ते मिले....प्यार मिला, अपनापन मिला और परेशानी में जिस तरह सबने साथ दिया उसे मैं कभी न भूल पाऊंगी, न ही उसका एहसान चुका पाऊंगी....मगर मेरी कुछ लोगों से शिकायत है। नाम लेकर मैं न उन्हें शर्मिंदगी देना चाहती और न खुद ही उनके स्तर पर जाना चाहती ....यह उनका तरीका भी हो सकता है....मगर मैं क्या ऐसे कई लोगों से मेरी बात हुई है जिन्होने इस तरीकों को गलत ठहराया है। जब मैं दोबारा सक्रिय हुई तो तमाम लोगों ने रचनाओं पर टिप्पणी की....कुछ लोगों की टिप्पणी बार-बार आई और तब तक आती रहीं जब तक मैं उनके ब्लाग की फॉलोअर नहीं बन गई और जब मैने ब्लॉग फॉलो कर लिया तो रचनाएं देखनी ही बंद कर दी, इधर से रुख ही मोड़ लिया। मैने तो उन ब्लॉग पर जाकर कहा भी मगर ढाक के तीन पात.....उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा। मैं चाहती तो कुछ उनके ब्लॉग पर कुछ टीका-टिप्पणी कर सकती थी या उस ब्लॉग से अलग भी हो सकती थी मगर मैं उस स्तर पर नहीं जाना चाहती। मेरी अपनी जगह है, पहचान है...जो रहनी ही चाहिए और हमने तो रचनाएं देखी थीं किसी व्यक्ति विशेष को नहीं। इसलिए ब्लॉग फॉलो किया था... इसमें रचनाओं का क्या दोष...अच्छे लेखन की तारीफ होनी ही चाहिए... किसी व्यक्ति विशेष से मतलब नहीं था लेकिन आज इतना जरूर कहूंगी कि अगर आपमें से किसी को भी किसी व्यक्ति की रचना पसंद आती है तो उस ब्लॉग को जरूर फॉलो करिए। इससे न केवल उत्साह बढ़ता है ..हो सकता है आप किसी के बहुत अच्छे मित्र बन जाएं ..कोई आपका मित्र बन जाए या अंजाने ही सही आपकी प्रेरणा उसमें नया उत्साह-नई उमंग भर दे...आप कहीं उसकी मरती आशाओं को जीवन दे दें.....और अपने फॉलोअर को आप भी न भूलें....अगर आपके ब्लॉग पर आकर कोई अपनी राय देता है तो आपका भी फर्ज बनता है कि आप भी अपनी राय उनकी रचनाओं पर जरूर दें...और पसंद आने पर फॉलो जरूर करें, फॉलोअर की बढ़ती संख्या एक अलग तरह का आत्म विश्वास देती है........ इससे आप रचना का सम्मान करेंगे और रचनाकार को इस सम्मान के अलावा क्या चाहिए.......कम से कम यह मत करिए कि तब तक जाकर उस ब्लॉग पर टिप्पणी करिए जब तक वह आपको फॉलो न  कर ले और जब फॉलो कर ले तो आप उस ब्लॉग को ही भूल जाएं । मेरा कहने का आशय यह है कि इतने मतलबी न बनें... राय देने से दूसरे का हौसला बढ़ता है और मन को भाता भी है....


पिछले सप्ताह वायरल की वजह से ज्यादा समय नहीं दे पाई और कल एक सप्ताह के लिए बाहर जा रही हूं वापस आकर सबके ब्लॉग पर अपनी उपस्थिति जरूर दर्ज कराऊंगी....तब तक नमस्कार...ईश्वर आप सबको खुश रखे...