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सोमवार, 18 जनवरी 2021

 

अल्हड़पन


वक्त के साथ जाने कहां खो गया

तेरा अमड़ेलापन और मेरा शहतूती अल्हड़पन

मन की गौरैया भी जाने कहां उड़ गई

छौने दहशत में हैं

कास से नहीं लहराते हम

दूब से नहीं तने हम

आओ फिर से बो दें

चाहत के बीज

पीछे वाले उजड़े जंगल में

         वीना श्रीवास्तव

         18.1.21

 


रविवार, 19 जून 2011

तेरी बात.........वीना

घुटन भरी थी वो रात
जिसने छेड़ी तेरी बात


मन की यादों में सिमटे हैं
पल जो साथ बिताए रात


मरते दम तक साथ रहेगी
तेरी चाहत की सौगात


चंदा को भी तरसेगी अब
झिलमिल तारों की बारात


मन की प्यास बढ़ा जाएगी
जब-जब आएगी बरसात