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बुधवार, 1 दिसंबर 2010

अंजाम-ए-मुहब्बत क्या होगा.....वीना

अंजाम-ए-मुहब्बत क्या होगा, जब दिल ही हम यूं लगा बैठे
अब  आगे  न  जाने क्या  होगा,  हम ऐसी  नादानी कर बैठे


शम्मा ही चली खुद जलने को, परवाने को तोहमत क्यूं दें हम
गुस्ताखी करी खुद शम्मा ने,  परवाने को क्यूं तरसा बैठे


वादों के तसव्वुर में खोकर, यादों को सजाया है हमने
यादें  ही तो  हैं  जीवन  में, यादों  पर हम भी  जी  बैठे


इश्क ईमान है इश्क अरमान है इश्क में हम सब बस इंसान हैं
इश्क में वीना ने जो सजदा किया ऐ खुदा हम तुझको भुला बैठे