कर्त्तव्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कर्त्तव्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 31 जनवरी 2011

युवा द्वंद्व.....................वीना

आज है द्वंद्व
युवा मानस में 
सत्य का, संघर्ष का
कर्त्तव्य का 
नभिज्ञ चाहत का
द्वंद्व
जो पलता है
अस्थिरता में
अनुगामी है चिंतन का
आकांक्षाएं
उड़ान भरती हैं
अभिलाषाएं
वीथिका ढूंढती हैं
वीथिका 
जो अग्रसर हैं
अनभिज्ञ लक्ष्य की ओर
मन
सब कुछ पाना चाहता है
अल्प अवधि में
पांव
पार करना चाहते हैं
सागर
एक छलांग में
हाथ
छूना चाहते हैं
आकाश
मात्र ....ऊपर उठने से
आंखें
देखना चाहती हैं सृष्टि को
एक नजर में
मन चाहता है
इस दुनिया को बंद करना
मुट्ठी में
पर....
असम्भव हैं 
वो... विशाल पांव
जो लांघ सके समुंदर
वो... विस्तृत हाथ
जो छू सकें आकाश
वो... दिव्य चक्षु
जो देख सकें सृष्टि को
और.... वो मन 
जो सब कुछ पाना चाहता है 
एक झटके में
सब कुछ तो है 
हमारे पास
अभाव है तो बस
संतोष का... विश्वास का
संतोष.....
जो देता है
सुख-शांति
विश्वास..... देता है
निश्चित प्रगति
है तो ..... 
असीमित, अनभिज्ञ
अभिलाषा, कर्त्तव्य विमुखता
एक संघर्ष
एक द्वंद्व
जो पलता है
अस्थिरता में