सोमवार, 18 जनवरी 2021

 

अल्हड़पन


वक्त के साथ जाने कहां खो गया

तेरा अमड़ेलापन और मेरा शहतूती अल्हड़पन

मन की गौरैया भी जाने कहां उड़ गई

छौने दहशत में हैं

कास से नहीं लहराते हम

दूब से नहीं तने हम

आओ फिर से बो दें

चाहत के बीज

पीछे वाले उजड़े जंगल में

         वीना श्रीवास्तव

         18.1.21

 


3 टिप्‍पणियां:

Hindi Kavita ने कहा…

आप की पोस्ट बहुत अच्छी है आप अपनी रचना यहाँ भी प्राकाशित कर सकते हैं, व महान रचनाकरो की प्रसिद्ध रचना पढ सकते हैं।

Zee Talwara ने कहा…

वक्त के साथ जाने कहां खो गया

तेरा अमड़ेलापन और मेरा शहतूती अल्हड़पन

मन की गौरैया भी जाने कहां उड़ गई

छौने दहशत में हैं

कास से नहीं लहराते हम

दूब से नहीं तने हम

आओ फिर से बो दें

चाहत के बीज

पीछे वाले उजड़े जंगल में

शानदार ! बड़ा ही सुन्दर लिखा है आपने ! इसके लिए आपका दिल से धन्यवाद। Visit Our Blog Zee Talwara

Insurance Baboo ने कहा…

वाह! लाजवाब!!
बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति
बहुत ही सुंदर लिंक धन्यवाद आपका
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