सोमवार, 15 नवंबर 2010

काफी समय बाद.....मैं और तुम.......वीना

काफी लम्बे समय बाद आपके सबके साथ हूं.....कुछ परेशानियों के बाद.....यह गीत भी मैने मंच पर पढ़ा है....इसी गीत के साथ हाजिर हूं...

रात नशीली मैं और तुम
यूं ही जागें मैं और तुम
कंगना खनके पायल छनके
प्रेम में डूबे मैं और तुम

पुरवइया के झोंके आए
आंचल तेरा यूं लहराए
मन काबू न रह पाए
संग में जागें मैं और तुम

फूलों के रंग में रंग तेरा
प्यार की धुन में स्वर तेरा
तू भी झूमें, मैं भी झूमूं
कैसे संभले मैं और तुम

चंदन वन की खुशबू तू
मस्त पवन की चंचल तू
धड़कन बोले मनवा डोले
दूर रहें न मैं और तुम

इतनी दूरी क्यों है सनम
शर्म-हया को छोड़ो तुम
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम

37 टिप्‍पणियां:

Yashwant R. B. Mathur ने कहा…

पुरवइया के झोंके आए
आंचल तेरा यूं लहराए
मन काबू न रह पाए
संग में जागें मैं और तुम

एक लम्बे समय के बाद दिल को छू लेने वाली शानदार कविता.

सादर

बेनामी ने कहा…

इतनी दूरी क्यों है सनम
शर्म-हया को छोड़ो तुम
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम

lambe arse baad behad khoobsurat geet..aur romantic bhi. congrates

बेनामी ने कहा…

इतनी दूरी क्यों है सनम
शर्म-हया को छोड़ो तुम
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम

lambe arse baad behad khoobsurat geet..aur romantic bhi. congrates

shalusri ने कहा…

पुरवइया के झोंके आए
आंचल तेरा यूं लहराए
मन काबू न रह पाए
संग में जागें मैं और तुम

अब क्या कहूं। बहुत ही प्यारा गीत है। इतने सहज शब्दों में इतनी प्यारी कहना तो कोई आपसे सीखे। बधाई वीना दी

संजय भास्‍कर ने कहा…

आदरणीय वीना जी
नमस्कार !
पुरवइया के झोंके आए आंचल तेरा यूं लहराएमन काबू न रह पाएसंग में जागें मैं और तुम
वाह ! कितनी अच्छी रचना लिखी है आपने....! बहुत ही पसंद आई
एक लम्बे समय के बाद दिल को छू लेने वाली .........शानदार कविता

M VERMA ने कहा…

तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम

एहसास की बहुत खूबसूरत रचना

vijay ने कहा…

चंदन वन की खुशबू तू
मस्त पवन की चंचल तू
धड़कन बोले मनवा डोले
दूर रहें न मैं और तुम

इतनी दूरी क्यों है सनम
शर्म-हया को छोड़ो तुम
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम

भई वाह मजा आ गया पढ़कर...इतने दिनों बाद इस खूबसूरत रचना के साथ आपका स्वागत है...

बेनामी ने कहा…

मन काबू न रह पाए
संग में जागें मैं और तुम

बहुत सुंदर रचना। बहुत-बहुत बधाई

aastha ने कहा…

बहुत सुंदर गीत है और आपने बहुत खूबसूरती से लिखा है। मन के भावों को बड़ी सुंगर तरीके से अभिव्यक्त किया है

aastha ने कहा…

पुरवइया के झोंके आए
आंचल तेरा यूं लहराए
मन काबू न रह पाए
संग में जागें मैं और तुम

बहुत सुंदर पंक्तियां हैं

aastha ने कहा…

पुरवइया के झोंके आए
आंचल तेरा यूं लहराए
मन काबू न रह पाए
संग में जागें मैं और तुम

बहुत सुंदर पंक्तियां हैं

Rajendra Tiwari ने कहा…

फिर सक्रिय होने पर स्वागत. लेकिन इतने अंतराल के लिए आपकी अक्रियता अखरी...

बेनामी ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कविता के साथ आपका पुनरागमन /....
दिल में उतर गयी ये रचना...
उम्मीद है अब आपके पुत्र ठीक होंगे....

बेनामी ने कहा…

अपनी शर्म धोने अब कहाँ जायेंगे ??...

daksha ने कहा…

dil ko chhu gaya, main or tum... shandar kavita..

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरत गीत ....आशा है अब सब कुशल मंगल होगा ...

बेनामी ने कहा…

वीणा जी,

सबसे पहले तो खुदा से दुआ है वो आपको तमाम दुश्वारियों से निज़ात अत फरमाए.....आमीन,

आपकी कविता बहुत सुन्दर है...मैं और तुम ...कोई फासला अब बाकी न रहा....बहुत सुन्दर |

vandana gupta ने कहा…

बहुत खूबसूरत रचना।

निर्मला कपिला ने कहा…

वाह वाह बहुत सुन्दर गीत लिखा। देर बाद लिखा करो हमे और ैऐसे ही प्यारे गीत पढने को मिलेंगे। बेटे की तबीयत अब कैसी है? आशा है अब वो स्कूल जाने लगा होग। उसे बहुत बहुत आशीर्वाद।
एक बार फिर कहूँ गीत बहुत ही अच्छा लगा। बधाई।
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम

रचना दीक्षित ने कहा…

तारीफ के इतने पुल बंधेगें तो साथ ही रहेंगे "मैं और तुम".अच्छा लगा प्यार से यूँ साथ साथ रहना

Amit Chandra ने कहा…

beena ji, kin shabdo me tarif karu. pahle ki tarah hi bemisal rachna. dhanyabad.

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

यशवंत जी, शान जी शालूजी, संजय जी, वर्मा जी विजय जी,पूजीजी आप सबका यहां आने और हौसलाफजाही करने का शुक्रिया...

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

आस्थाजी, राजेंद्रजी, इमरान जी,शेखर जी दक्षा जी संगीता ज, वंदना जी, निर्मला जी,रचनाजी, एहसास जी आप सबका दिल से शुक्रिया, इमरान जी आपकी दुआ कुबूल हो,आपकी दुआएं ही हैं जो मुसीबतों से निजात दिलाती हैं। आपको दुनिया की हर खुशी मिले। निर्मला जी बेटा स्कूल जा रहा है लेकिन खेलना बंद है....

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

देर आये दुरुस्त आये...कुछ मनभावन लाये.

सुंदर प्रस्तुति.

अरुण अवध ने कहा…

सुन्दर गीत वीणा जी ,बहुत बधाई !

rajesh singh kshatri ने कहा…

very nice

hot girl ने कहा…

तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम...
bahut khub.

vijai Rajbali Mathur ने कहा…

Marmik kavita achchhee hai.
Ab Hemabh poorn svasth hoga,uske liye mangal kamnayen.

daanish ने कहा…

शब्द शब्द
गीतात्मकता और लय से भरपूर ...
एक गीत की तरह ही अनुपम गीत . . .

अभिवादन .

Unknown ने कहा…

_____वीणा जी ,,,
प्रेम और समर्पण दोनों का अद्भुत संगम है आपकी यह कविता.......
अगर समय मिले तो मेरा ब्लॉग भी है भ्रमण के लिए.....
_____जोगेन्द्र सिंह..... :)
(मेरी लेखनी..मेरे विचार..)

.

उपेन्द्र नाथ ने कहा…

वीणा जी बहुत ही प्यारा प्रणय गीत है।

Unknown ने कहा…

वाह वीणा जी! बहुत ही दमदार, बेहतरीन वापसी।

Unknown ने कहा…

अत्यंत हीं रोमानी रचना। बधाई।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है ... अच्छे भाव लिए ...

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

khubsurat bhaw liye ek bahut pyari rachna....

इतनी दूरी क्यों है सनम
शर्म-हया को छोड़ो तुम
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम

kya baat hai....:)

Vivek Mishrs ने कहा…

दिल को छू लेने वाली शानदार कविता....
बहुत सुन्दर गीत लिखा है।

सादर

monali ने कहा…

Very beautiful.. kisi unmaad si mann par chhati huyi kavita behad pasand aayi :)