काफी लम्बे समय बाद आपके सबके साथ हूं.....कुछ परेशानियों के बाद.....यह गीत भी मैने मंच पर पढ़ा है....इसी गीत के साथ हाजिर हूं...
रात नशीली मैं और तुम
यूं ही जागें मैं और तुम
कंगना खनके पायल छनके
प्रेम में डूबे मैं और तुम
पुरवइया के झोंके आए
आंचल तेरा यूं लहराए
मन काबू न रह पाए
संग में जागें मैं और तुम
फूलों के रंग में रंग तेरा
प्यार की धुन में स्वर तेरा
तू भी झूमें, मैं भी झूमूं
कैसे संभले मैं और तुम
चंदन वन की खुशबू तू
मस्त पवन की चंचल तू
धड़कन बोले मनवा डोले
दूर रहें न मैं और तुम
इतनी दूरी क्यों है सनम
शर्म-हया को छोड़ो तुम
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम
38 टिप्पणियाँ:
पुरवइया के झोंके आए
आंचल तेरा यूं लहराए
मन काबू न रह पाए
संग में जागें मैं और तुम
एक लम्बे समय के बाद दिल को छू लेने वाली शानदार कविता.
सादर
इतनी दूरी क्यों है सनम
शर्म-हया को छोड़ो तुम
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम
lambe arse baad behad khoobsurat geet..aur romantic bhi. congrates
इतनी दूरी क्यों है सनम
शर्म-हया को छोड़ो तुम
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम
lambe arse baad behad khoobsurat geet..aur romantic bhi. congrates
पुरवइया के झोंके आए
आंचल तेरा यूं लहराए
मन काबू न रह पाए
संग में जागें मैं और तुम
अब क्या कहूं। बहुत ही प्यारा गीत है। इतने सहज शब्दों में इतनी प्यारी कहना तो कोई आपसे सीखे। बधाई वीना दी
आदरणीय वीना जी
नमस्कार !
पुरवइया के झोंके आए आंचल तेरा यूं लहराएमन काबू न रह पाएसंग में जागें मैं और तुम
वाह ! कितनी अच्छी रचना लिखी है आपने....! बहुत ही पसंद आई
एक लम्बे समय के बाद दिल को छू लेने वाली .........शानदार कविता
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम
एहसास की बहुत खूबसूरत रचना
चंदन वन की खुशबू तू
मस्त पवन की चंचल तू
धड़कन बोले मनवा डोले
दूर रहें न मैं और तुम
इतनी दूरी क्यों है सनम
शर्म-हया को छोड़ो तुम
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम
भई वाह मजा आ गया पढ़कर...इतने दिनों बाद इस खूबसूरत रचना के साथ आपका स्वागत है...
मन काबू न रह पाए
संग में जागें मैं और तुम
बहुत सुंदर रचना। बहुत-बहुत बधाई
बहुत सुंदर गीत है और आपने बहुत खूबसूरती से लिखा है। मन के भावों को बड़ी सुंगर तरीके से अभिव्यक्त किया है
पुरवइया के झोंके आए
आंचल तेरा यूं लहराए
मन काबू न रह पाए
संग में जागें मैं और तुम
बहुत सुंदर पंक्तियां हैं
पुरवइया के झोंके आए
आंचल तेरा यूं लहराए
मन काबू न रह पाए
संग में जागें मैं और तुम
बहुत सुंदर पंक्तियां हैं
फिर सक्रिय होने पर स्वागत. लेकिन इतने अंतराल के लिए आपकी अक्रियता अखरी...
बहुत ही सुन्दर कविता के साथ आपका पुनरागमन /....
दिल में उतर गयी ये रचना...
उम्मीद है अब आपके पुत्र ठीक होंगे....
अपनी शर्म धोने अब कहाँ जायेंगे ??...
dil ko chhu gaya, main or tum... shandar kavita..
बहुत खूबसूरत गीत ....आशा है अब सब कुशल मंगल होगा ...
वीणा जी,
सबसे पहले तो खुदा से दुआ है वो आपको तमाम दुश्वारियों से निज़ात अत फरमाए.....आमीन,
आपकी कविता बहुत सुन्दर है...मैं और तुम ...कोई फासला अब बाकी न रहा....बहुत सुन्दर |
बहुत खूबसूरत रचना।
वाह वाह बहुत सुन्दर गीत लिखा। देर बाद लिखा करो हमे और ैऐसे ही प्यारे गीत पढने को मिलेंगे। बेटे की तबीयत अब कैसी है? आशा है अब वो स्कूल जाने लगा होग। उसे बहुत बहुत आशीर्वाद।
एक बार फिर कहूँ गीत बहुत ही अच्छा लगा। बधाई।
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम
तारीफ के इतने पुल बंधेगें तो साथ ही रहेंगे "मैं और तुम".अच्छा लगा प्यार से यूँ साथ साथ रहना
beena ji, kin shabdo me tarif karu. pahle ki tarah hi bemisal rachna. dhanyabad.
यशवंत जी, शान जी शालूजी, संजय जी, वर्मा जी विजय जी,पूजीजी आप सबका यहां आने और हौसलाफजाही करने का शुक्रिया...
आस्थाजी, राजेंद्रजी, इमरान जी,शेखर जी दक्षा जी संगीता ज, वंदना जी, निर्मला जी,रचनाजी, एहसास जी आप सबका दिल से शुक्रिया, इमरान जी आपकी दुआ कुबूल हो,आपकी दुआएं ही हैं जो मुसीबतों से निजात दिलाती हैं। आपको दुनिया की हर खुशी मिले। निर्मला जी बेटा स्कूल जा रहा है लेकिन खेलना बंद है....
देर आये दुरुस्त आये...कुछ मनभावन लाये.
सुंदर प्रस्तुति.
सुन्दर गीत वीणा जी ,बहुत बधाई !
very nice
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम...
bahut khub.
good
Marmik kavita achchhee hai.
Ab Hemabh poorn svasth hoga,uske liye mangal kamnayen.
शब्द शब्द
गीतात्मकता और लय से भरपूर ...
एक गीत की तरह ही अनुपम गीत . . .
अभिवादन .
_____वीणा जी ,,,
प्रेम और समर्पण दोनों का अद्भुत संगम है आपकी यह कविता.......
अगर समय मिले तो मेरा ब्लॉग भी है भ्रमण के लिए.....
_____जोगेन्द्र सिंह..... :)
(मेरी लेखनी..मेरे विचार..)
.
वीणा जी बहुत ही प्यारा प्रणय गीत है।
वाह वीणा जी! बहुत ही दमदार, बेहतरीन वापसी।
अत्यंत हीं रोमानी रचना। बधाई।
बहुत सुन्दर रचना है ... अच्छे भाव लिए ...
khubsurat bhaw liye ek bahut pyari rachna....
इतनी दूरी क्यों है सनम
शर्म-हया को छोड़ो तुम
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम
kya baat hai....:)
दिल को छू लेने वाली शानदार कविता....
बहुत सुन्दर गीत लिखा है।
सादर
Very beautiful.. kisi unmaad si mann par chhati huyi kavita behad pasand aayi :)
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