रविवार, 1 सितंबर 2013

मत बनाओ गगन का चांद


मैं
चाहती हूं
धरा पर रहना
तुम्हारे साथ
जीवन भर
अंतिम समय तक
मुझे मत बनाओ
गगन का चांद
रहने दो
अपनी बाहों में
देवी समझकर
मत अर्पण करो
पुष्प
मेरे कदमों पर
लगा दो

एक कली
मेरे बालों में
खिल जाने दो मुझे
फूल बनकर


वीना श्रीवास्तव

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