तमन्ना के रेगिस्तान में उड़ते हैं रेत के बादल
गुबारों के बवंडर में मैं अब फंसना नहीं चाहत
ग़में इश्क ने सोखा है मेरे जज्बात का चश्मा
हसरतों के झरने में मैं अब बहना नहीं चाहती
गुबारों के बवंडर में मैं अब फंसना नहीं चाहत
ग़में इश्क ने सोखा है मेरे जज्बात का चश्मा
हसरतों के झरने में मैं अब बहना नहीं चाहती
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