सोमवार, 24 जनवरी 2011

नया आयाम...........वीना


धरा से जुड़ी हकीकत
होती है
नभ से ऊंची
प्यार की पूजा
होती है
ईमान से ऊंची
एक बार
केवल
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से
डूब के देखो
प्यार में
आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
आकाश से
गहराई में उतर जाओगे
पाताल की
बिना पंख
छुओगे ऊंचाई
गगन की
नापोगे गहराई
समुंदर की
आकाश
धरती
दिल के संगम से
मिलेगा
एक नया आयाम
पंखों को गति
विचारों को गंभीरता

51 टिप्‍पणियां:

Yashwant R. B. Mathur ने कहा…

बहुत ही सार्थक सन्देश देती प्रेरक कविता.

सादर
----------
क्या आज क़े नौजवान नेताजी का पुनर्मूल्यांकन करवा सकेंगे?

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

aisa aaayam pana sambhav hai kya:)

bahut pyari rachna...

Rajiv ने कहा…

वीणा जी,
प्यार में डूबने और धरा से जुड़ने पर निश्चय ही लोग " पाताल की अनंत गहराई में उतर जाते हैं,बिना पंख छू लेते हैं आसमान की असीम ऊंचाई.सूर और तुलसी एक तरफ,सीरी और फरहाद दूसरी तरफ.हर तरफ प्यार की इन्तहा थी क्योंकि इससे ऊँचा,इससे गहरा कुछ भी नहीं. भावों के बेहतरीन संयोजन से प्रभावी अर्थ ग्रहण करती रचना केलिये बधाई.

aastha ने कहा…

आकाश
धरती
दिल के संगम से
मिलेगा
एक नया आयाम
पंखों को गति
विचारों को गंभीरता

हां समझो तो बहुत कुछ है और न समझो तो कुछ नही। बहुत ही प्यारी रचना..

बेनामी ने कहा…

यह सब कुछ प्यार करने वालों के लिए ही सम्भव है। और सच मानिए तो प्यार से बढ़कर कुछ भी नहीं। जिस दिल में प्यार है वो कभी गलत नहीं करेगा..
दिल को छूने वाली रचना..

vijay ने कहा…

नमस्ते दी,
कैसी रही आपकी नैनीताल-रामगढ़ यात्रा, बहुत सुंदर रचना है

girish pankaj ने कहा…

prerak kavita ke liye dil se badhai...

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

'आकाश
धरती
दिल के संगम से मिलेगा '
प्यार से बढ़कर कुछ भी नहीं |
बहुत कोमल भावों की रचना !

vijai Rajbali Mathur ने कहा…

मर्मस्पर्शी कविता से सीख लेकर लाभ उठाया जा सकता है.

vandana gupta ने कहा…

दिल के संगम से
मिलेगा
एक नया आयाम
पंखों को गति
विचारों को गंभीरता

सुन्दर संदेश देती रचना।

एस एम् मासूम ने कहा…

एक बार केवल
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से
डूब के देखो
प्यार में आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
.

बहुत सुंदर कविता

Kailash Sharma ने कहा…

केवल
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से

....बहुत प्रेरक प्रस्तुति..आभार

संजय भास्‍कर ने कहा…

आदरणीय वीणा जी
नमस्कार !
धरा से जुड़ी हकीकत
होती है
नभ से ऊंची
प्यार की पूजा
होती है
ईमान से ऊंची
.....सुन्दर संदेश देती रचना।

संजय भास्‍कर ने कहा…

ह्र्दय की गहराई से निकली अनुभूति रूपी सशक्त रचना

shalusri ने कहा…

एक बार केवल
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से
डूब के देखो
प्यार में आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा

बहुत उम्दा कविता। सही में जरूरत एक बार जुड़ के देखने में है। लाजवाब।

बेनामी ने कहा…

हर कविता की तरह ये भी अति उत्तम। बहुत अच्छी कविता है। सार्थक संदेश

Unknown ने कहा…

आकाश
धरती
दिल के संगम से
मिलेगा
एक नया आयाम
पंखों को गति
विचारों को गंभीरता

बहुत सुंदर प्रस्तुति के लिए बधाई

Amit Chandra ने कहा…

रूह को सुकुन देती एक प्यारी कविता। आभार।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

धरा में जुड़े रहने का आनन्द गहरा है।

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

ह्रदय के सुंदर भाव लिए प्यारी कविता ....

मनोज कुमार ने कहा…

प्रेरक और रोचक कविता। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
बालिका दिवस
हाउस वाइफ़

विशाल ने कहा…

धरा से जुड़ी हकीकत
होती है
नभ से ऊंची
प्यार की पूजा
होती है
ईमान से ऊंची

बहुत ही भावपूर्ण अभिव्यक्ति .आप की कलम को सलाम.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

धरा से जुड़ी हकीकत
होती है
नभ से ऊंची
प्यार की पूजा
होती है
ईमान से ऊंची
एक बार
केवल
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से
डूब के देखो
प्यार में
आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
आकाश से
गहराई में उतर जाओगे...waah, bahut hi sundar khyaal

अरुण अवध ने कहा…

प्रेम तो मनुष्य को ईश्वरत्व तक ऊपर उठा देता है !
फिर उसके लिए आकाश भी ओछा
और पातळ भी उथला हो जाता है !
सार्थक लेखन रहा आपका !
सुन्दर रचना के लिए बधाई !

बेनामी ने कहा…

वीणा जी,

बहुत सुन्दर पोस्ट लगी......भावो की सुन्दर अभिव्यक्ति|

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

वैसे यदि ऊँचा उठना है तो गहराई में जाना होता है ..और ज़मीन से भी जुड़े रहना होता है ...बहुत अच्छे भावों को संजोया है ..

कुमार संतोष ने कहा…

बहुत ही सुंदर कविता, मन को छूती हुई,
आभार !!

रचना दीक्षित ने कहा…

बेहतरीन प्रस्तुति वीणा जी, एक बहुत खूबसूरत सच है ये और बहुत विस्तृत भी. इसे भी किसी सीमा में बांधना मुश्किल है क्योंकि इसके रूप अनेक हैं और किसी से भी किया जा सकता है यहाँ तक की ईश्वर से भी.

ishwar khandeliya ने कहा…

बहुत ही शानदार बात कह दी आपने
केवल
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से
डूब के देखो
प्यार में
आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
आकाश से
......................
पर क्या यह हमारा दुर्भाग्य नहीं है की हममे से बहुत ही कम लोग जुड़ पा रहें हैं अपनी धरा से
मन की वीणा के तारों को झंक्रीत करती हुई रचना के लिए साधुवाद
आपकी रचनाधर्मिता को कोटी कोटी नमन
ईश्वर खंदेलिया

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

डूब के देखो
प्यार में आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
आकाश से

ये प्यार ही तो खोता जा रहा है मनुष्य .....
अच्छी रचना ....!!

उपेन्द्र नाथ ने कहा…

वीना जी भावों से परिपूर्ण बहुत ही सुंदर कविता...... बहुत ही अच्छी सीख देती हुई.
बुलंद हौसले का दूसरा नाम : आभा खेत्रपाल

amrendra "amar" ने कहा…

Sunder aur sarthak rachna kliye aapko bahut bahut badhai

vijai Rajbali Mathur ने कहा…

आप सब को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं.

महेन्‍द्र वर्मा ने कहा…

केवल
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से
डूब के देखो
प्यार में
आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
आकाश से
गहराई में उतर जाओगे

वाह, बहुत ही खूबसूरत कविता की रचना की है आपने वीना जी।

गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई।

Kunwar Kusumesh ने कहा…

गणतंत्र दिवस की आपको हार्दिक शुभकामनायें.

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत ही सार्थक सन्देश देती प्रेरक कविता|
गणतंत्र दिवस की आपको हार्दिक शुभकामनायें|

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

इस दुनियाँ में सब कुछ मिलता है सिवा सच्चे प्यार के !
कविता में प्यार की सुन्दर भावनाएं बड़ी कोमकता से मुखरित हुई हैं !
भाव पूर्ण कविता मन को छूती है !
आभार, वीना जी !

जय शंकर ने कहा…

bahut achchhi prastuti veena ji.

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

किसी ने लिखा है...
लाश थी
इसलिए तैरती रह गयी
डूबने के लिए
ज़िंदगी चाहिए।

Unknown ने कहा…

नाम के अनुरूप ब्लॉग .... अति सुन्दर .बधाई बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ....शुभकामनायें

Amrita Tanmay ने कहा…

बड़ी तन्मयता के साथ आपको पढ़ा ...क्या कहूँ? ...हाँ! बहुत अच्छा लिखती हैं आप .. आपको बधाई . आपको पढ़ना सुखद लग रहा है .

Coral ने कहा…

बहुत सुन्दर सार्थक सन्देश देती रचना ...बधाई

-----------
बस एक और हो जाये ....

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

आदरणीया वीणा जी
नमस्कार !

आशा है, आप पूर्णतः स्वस्थ होंगी । परिवार में कुशल मंगल होगा ।

नया आयाम रचना के माध्यम से आपने झूले का भी आनन्द दिला दिया :)
यह ऊंचाई की ओऽऽर … अब गहराई की ओऽऽऽर …
आपके साथ आकाश से पाताल तक का विचरण मन को भा गया … :)

विनोद की बात थी ।

दिल के संगम से
मिलेगा एक नया आयाम
पंखों को गति
विचारों को गंभीरता

बहुत गहन गंभीर रचना के लिए हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !

- राजेन्द्र स्वर्णकार

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

आदरणीया वीणा जी
नमस्कार !

आशा है, आप पूर्णतः स्वस्थ होंगी । परिवार में कुशल मंगल होगा ।

नया आयाम रचना के माध्यम से आपने झूले का भी आनन्द दिला दिया :)
यह ऊंचाई की ओऽऽर … अब गहराई की ओऽऽऽर …
आपके साथ आकाश से पाताल तक का विचरण मन को भा गया … :)

विनोद की बात थी ।

दिल के संगम से
मिलेगा एक नया आयाम
पंखों को गति
विचारों को गंभीरता

बहुत गहन गंभीर रचना के लिए हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !

- राजेन्द्र स्वर्णकार

निर्मला कपिला ने कहा…

प्यार में
आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
आकाश से
गहराई में उतर जाओगे
पाताल की
बिना पंख
बिलकुल सही कहा सार्थक सन्देश। बधाई।

शारदा अरोरा ने कहा…

bahut sundar bhav hain ..aaee hoon to salaam karti chalun ..

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

यशवंत जी,मुकेश जी,राजीव जी, आस्था जी, शान जी,विजय जी, गिरीश जी, सुरेंद्र जी, वंदना जी, कैलाश जी, मासूम जी,मनोज, जी, सेजबाब, रश्मि जी,पूजा, अहसास जी ,प्रवीण जी,
आप सबका यहां आने और अपनी कीमती राय देने का शुक्रिया

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

संगीता जी, संजय जी, विजय माथुर जी,महेंद्र जी, मिसिर जी, अमरेंद्र जी,कुसुमेश जी, पटाली साहब,अमृता जी, वर्ज्य नारी स्वर,एहसास जी, डा. मोनिका,पूजा, शालू, गिरीश जी, ज्ञानचंद जी,जय शंकर जी, देवेंद्र जी,कोरल, राजेंद्र जी,निर्मला जी, संतोष जी, रचना जी, ईश्वर जी, हरकीरत जी, इमरान जी और शारदा जी आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया.....

अभिषेक मिश्र ने कहा…

सार्थक और संदेशात्मक पंक्तियाँ.

Dinesh pareek ने कहा…

बहुत अच्छा अति सुन्दर बस इसी तरह लगे रहिये
http://vangaydinesh.blogspot.com/

SAJAN.AAWARA ने कहा…

ACHA SANDES DETI RACHNA...... AAPKI RACHNAYE VASTVIKTA PAR AADHARIT HOTI HAIN... PADHKAR ACHA LAGTA HAI. . . . . . JAI HIND JAI BHARAT