धरा से जुड़ी हकीकत
होती है
नभ से ऊंची
प्यार की पूजा
होती है
ईमान से ऊंची
एक बार
होती है
नभ से ऊंची
प्यार की पूजा
होती है
ईमान से ऊंची
एक बार
केवल
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से
डूब के देखो
प्यार में
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से
डूब के देखो
प्यार में
आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
आकाश से
गहराई में उतर जाओगे
पाताल की
बिना पंख
छुओगे ऊंचाई
पाओगे खुद को ऊंचा
आकाश से
गहराई में उतर जाओगे
पाताल की
बिना पंख
छुओगे ऊंचाई
गगन की
नापोगे गहराई
समुंदर की
आकाश
नापोगे गहराई
समुंदर की
आकाश
धरती
दिल के संगम से
मिलेगा
दिल के संगम से
मिलेगा
एक नया आयाम
पंखों को गति
विचारों को गंभीरता
पंखों को गति
विचारों को गंभीरता
51 टिप्पणियां:
बहुत ही सार्थक सन्देश देती प्रेरक कविता.
सादर
----------
क्या आज क़े नौजवान नेताजी का पुनर्मूल्यांकन करवा सकेंगे?
aisa aaayam pana sambhav hai kya:)
bahut pyari rachna...
वीणा जी,
प्यार में डूबने और धरा से जुड़ने पर निश्चय ही लोग " पाताल की अनंत गहराई में उतर जाते हैं,बिना पंख छू लेते हैं आसमान की असीम ऊंचाई.सूर और तुलसी एक तरफ,सीरी और फरहाद दूसरी तरफ.हर तरफ प्यार की इन्तहा थी क्योंकि इससे ऊँचा,इससे गहरा कुछ भी नहीं. भावों के बेहतरीन संयोजन से प्रभावी अर्थ ग्रहण करती रचना केलिये बधाई.
आकाश
धरती
दिल के संगम से
मिलेगा
एक नया आयाम
पंखों को गति
विचारों को गंभीरता
हां समझो तो बहुत कुछ है और न समझो तो कुछ नही। बहुत ही प्यारी रचना..
यह सब कुछ प्यार करने वालों के लिए ही सम्भव है। और सच मानिए तो प्यार से बढ़कर कुछ भी नहीं। जिस दिल में प्यार है वो कभी गलत नहीं करेगा..
दिल को छूने वाली रचना..
नमस्ते दी,
कैसी रही आपकी नैनीताल-रामगढ़ यात्रा, बहुत सुंदर रचना है
prerak kavita ke liye dil se badhai...
'आकाश
धरती
दिल के संगम से मिलेगा '
प्यार से बढ़कर कुछ भी नहीं |
बहुत कोमल भावों की रचना !
मर्मस्पर्शी कविता से सीख लेकर लाभ उठाया जा सकता है.
दिल के संगम से
मिलेगा
एक नया आयाम
पंखों को गति
विचारों को गंभीरता
सुन्दर संदेश देती रचना।
एक बार केवल
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से
डूब के देखो
प्यार में आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
.
बहुत सुंदर कविता
केवल
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से
....बहुत प्रेरक प्रस्तुति..आभार
आदरणीय वीणा जी
नमस्कार !
धरा से जुड़ी हकीकत
होती है
नभ से ऊंची
प्यार की पूजा
होती है
ईमान से ऊंची
.....सुन्दर संदेश देती रचना।
ह्र्दय की गहराई से निकली अनुभूति रूपी सशक्त रचना
एक बार केवल
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से
डूब के देखो
प्यार में आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
बहुत उम्दा कविता। सही में जरूरत एक बार जुड़ के देखने में है। लाजवाब।
हर कविता की तरह ये भी अति उत्तम। बहुत अच्छी कविता है। सार्थक संदेश
आकाश
धरती
दिल के संगम से
मिलेगा
एक नया आयाम
पंखों को गति
विचारों को गंभीरता
बहुत सुंदर प्रस्तुति के लिए बधाई
रूह को सुकुन देती एक प्यारी कविता। आभार।
धरा में जुड़े रहने का आनन्द गहरा है।
ह्रदय के सुंदर भाव लिए प्यारी कविता ....
प्रेरक और रोचक कविता। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
बालिका दिवस
हाउस वाइफ़
धरा से जुड़ी हकीकत
होती है
नभ से ऊंची
प्यार की पूजा
होती है
ईमान से ऊंची
बहुत ही भावपूर्ण अभिव्यक्ति .आप की कलम को सलाम.
धरा से जुड़ी हकीकत
होती है
नभ से ऊंची
प्यार की पूजा
होती है
ईमान से ऊंची
एक बार
केवल
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से
डूब के देखो
प्यार में
आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
आकाश से
गहराई में उतर जाओगे...waah, bahut hi sundar khyaal
प्रेम तो मनुष्य को ईश्वरत्व तक ऊपर उठा देता है !
फिर उसके लिए आकाश भी ओछा
और पातळ भी उथला हो जाता है !
सार्थक लेखन रहा आपका !
सुन्दर रचना के लिए बधाई !
वीणा जी,
बहुत सुन्दर पोस्ट लगी......भावो की सुन्दर अभिव्यक्ति|
वैसे यदि ऊँचा उठना है तो गहराई में जाना होता है ..और ज़मीन से भी जुड़े रहना होता है ...बहुत अच्छे भावों को संजोया है ..
बहुत ही सुंदर कविता, मन को छूती हुई,
आभार !!
बेहतरीन प्रस्तुति वीणा जी, एक बहुत खूबसूरत सच है ये और बहुत विस्तृत भी. इसे भी किसी सीमा में बांधना मुश्किल है क्योंकि इसके रूप अनेक हैं और किसी से भी किया जा सकता है यहाँ तक की ईश्वर से भी.
बहुत ही शानदार बात कह दी आपने
केवल
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से
डूब के देखो
प्यार में
आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
आकाश से
......................
पर क्या यह हमारा दुर्भाग्य नहीं है की हममे से बहुत ही कम लोग जुड़ पा रहें हैं अपनी धरा से
मन की वीणा के तारों को झंक्रीत करती हुई रचना के लिए साधुवाद
आपकी रचनाधर्मिता को कोटी कोटी नमन
ईश्वर खंदेलिया
डूब के देखो
प्यार में आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
आकाश से
ये प्यार ही तो खोता जा रहा है मनुष्य .....
अच्छी रचना ....!!
वीना जी भावों से परिपूर्ण बहुत ही सुंदर कविता...... बहुत ही अच्छी सीख देती हुई.
बुलंद हौसले का दूसरा नाम : आभा खेत्रपाल
Sunder aur sarthak rachna kliye aapko bahut bahut badhai
आप सब को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं.
केवल
एक बार
जुड़ के देखो
धरा से
डूब के देखो
प्यार में
आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
आकाश से
गहराई में उतर जाओगे
वाह, बहुत ही खूबसूरत कविता की रचना की है आपने वीना जी।
गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई।
गणतंत्र दिवस की आपको हार्दिक शुभकामनायें.
बहुत ही सार्थक सन्देश देती प्रेरक कविता|
गणतंत्र दिवस की आपको हार्दिक शुभकामनायें|
इस दुनियाँ में सब कुछ मिलता है सिवा सच्चे प्यार के !
कविता में प्यार की सुन्दर भावनाएं बड़ी कोमकता से मुखरित हुई हैं !
भाव पूर्ण कविता मन को छूती है !
आभार, वीना जी !
bahut achchhi prastuti veena ji.
किसी ने लिखा है...
लाश थी
इसलिए तैरती रह गयी
डूबने के लिए
ज़िंदगी चाहिए।
नाम के अनुरूप ब्लॉग .... अति सुन्दर .बधाई बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ....शुभकामनायें
बड़ी तन्मयता के साथ आपको पढ़ा ...क्या कहूँ? ...हाँ! बहुत अच्छा लिखती हैं आप .. आपको बधाई . आपको पढ़ना सुखद लग रहा है .
बहुत सुन्दर सार्थक सन्देश देती रचना ...बधाई
-----------
बस एक और हो जाये ....
आदरणीया वीणा जी
नमस्कार !
आशा है, आप पूर्णतः स्वस्थ होंगी । परिवार में कुशल मंगल होगा ।
नया आयाम रचना के माध्यम से आपने झूले का भी आनन्द दिला दिया :)
यह ऊंचाई की ओऽऽर … अब गहराई की ओऽऽऽर …
आपके साथ आकाश से पाताल तक का विचरण मन को भा गया … :)
विनोद की बात थी ।
दिल के संगम से
मिलेगा एक नया आयाम
पंखों को गति
विचारों को गंभीरता
बहुत गहन गंभीर रचना के लिए हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार
आदरणीया वीणा जी
नमस्कार !
आशा है, आप पूर्णतः स्वस्थ होंगी । परिवार में कुशल मंगल होगा ।
नया आयाम रचना के माध्यम से आपने झूले का भी आनन्द दिला दिया :)
यह ऊंचाई की ओऽऽर … अब गहराई की ओऽऽऽर …
आपके साथ आकाश से पाताल तक का विचरण मन को भा गया … :)
विनोद की बात थी ।
दिल के संगम से
मिलेगा एक नया आयाम
पंखों को गति
विचारों को गंभीरता
बहुत गहन गंभीर रचना के लिए हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार
प्यार में
आत्मीयता में
पाओगे खुद को ऊंचा
आकाश से
गहराई में उतर जाओगे
पाताल की
बिना पंख
बिलकुल सही कहा सार्थक सन्देश। बधाई।
bahut sundar bhav hain ..aaee hoon to salaam karti chalun ..
यशवंत जी,मुकेश जी,राजीव जी, आस्था जी, शान जी,विजय जी, गिरीश जी, सुरेंद्र जी, वंदना जी, कैलाश जी, मासूम जी,मनोज, जी, सेजबाब, रश्मि जी,पूजा, अहसास जी ,प्रवीण जी,
आप सबका यहां आने और अपनी कीमती राय देने का शुक्रिया
संगीता जी, संजय जी, विजय माथुर जी,महेंद्र जी, मिसिर जी, अमरेंद्र जी,कुसुमेश जी, पटाली साहब,अमृता जी, वर्ज्य नारी स्वर,एहसास जी, डा. मोनिका,पूजा, शालू, गिरीश जी, ज्ञानचंद जी,जय शंकर जी, देवेंद्र जी,कोरल, राजेंद्र जी,निर्मला जी, संतोष जी, रचना जी, ईश्वर जी, हरकीरत जी, इमरान जी और शारदा जी आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया.....
सार्थक और संदेशात्मक पंक्तियाँ.
बहुत अच्छा अति सुन्दर बस इसी तरह लगे रहिये
http://vangaydinesh.blogspot.com/
ACHA SANDES DETI RACHNA...... AAPKI RACHNAYE VASTVIKTA PAR AADHARIT HOTI HAIN... PADHKAR ACHA LAGTA HAI. . . . . . JAI HIND JAI BHARAT
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