बुधवार, 19 दिसंबर 2012

प्रयास....


बहुत प्रयास किया
सुखा सकूं
गरीबी से झरते आंसू
सुखाड़ ने सुखा दिए
खेत-खलिहान सारे
काश! झरने-सा बहता 
ये खारा पानी
सींच सकता बंजर धरा को
तो खिल उठती मुस्कुराहटों की फसल
लहलहा उठती
दूर क्षितिज तक फैली वसुधा
बहुत प्रयास किया
गरीबों को दे सकूं
दो जून की रोटी
ताकि सो सकें वो
एक रात चैन की
जब फिक्र ना रहे उन्हें
अगली सुबह देहाड़ी की
कैसे दे पाएंगे हम
उन्हें छोटा-सा घरौंदा
बहुत प्रयास किया
बेटियों को बचाने का
गिद्धों के हाथ से
नहीं बचा पाई
वासना के आवेग से
कोई बची
तो भी कहीं ना कहीं
गिद्ध की चोंच घायल कर गई
उसकी आत्मा, उसके अंग
नहीं मिटा पाई
उनके दिये घावों के निशान
बहुत प्रयास किया
रोक सकूं
कूड़े के ढेर से
पन्नी बीनते बच्चों को
लाख प्रयास किया
ना बनने दूं
कचरे को गरीबी का हिस्सा
झोपड़ पट्टियों में
पलती-बढ़ती है
गरीबी और गंदगी साथ-साथ
कैसे अलग कर सकूंगी
घावों में रेंगते कीड़े
मल में डेरा जमाए
मक्खियों का झुंड
पूंजीवाद, साम्यवाद या समाजवाद
किस वाद में जी रहे हैं
ये नागरिक ?
कैसे बनेगा हमारा भारत महान ?
जब तक जीते रहेंगे ये
लाचारी, गरीबी, बेबसी और बदहाली में
बेईमानी है
मेरा भारत महान का नारा
गर्व से कैसे कहेंगे
हम भारतीय हैं

11 टिप्‍पणियां:

Madan Mohan Saxena ने कहा…

शब्दों का सौन्दर्य सहज ढंग से अभिव्यक्त हो रहा है
बहुत सराहनीय प्रस्तुति. आभार. बधाई आपको

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आत्ममंथन का विषय है, गहरे और कठोर निर्णय लेने होंगे।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ये आत्म्नान्थान जरूरी है ... सभी देस्व्वासियों के लिए ...
सार्थक चिंतन ...

Yashwant R. B. Mathur ने कहा…

आत्म मंथन को प्रेरित करती बेहतरीन कविता


सादर

Mamta Bajpai ने कहा…

मेरा भारत महान का नारा
गर्व से कैसे कहेंगे
हम भारतीय हैं
sakaratmak chintan

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बेहतरीन,सार्थक चिंतन को परित करती सुंदर रचना,,

recent post: वजूद,

ओंकारनाथ मिश्र ने कहा…

बिलकुल सही कहा. भारत महान होने से पहले बहुत कार्य होने बांकी है.

Unknown ने कहा…

Bahut sunder... problems are plenty ...and solutions are difficult ...

Ankur Jain ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति..बधाई।।।

आत्ममंथन को मजबूर करती रचना।।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

http://www.parikalpnaa.com/2012/12/blog-post_22.html

Unknown ने कहा…

आत्मचिन्तन को प्रेरित करती भावपूर्ण रचना । बधाई।