यह नाविक की
कश्ती नहीं
जिस पर बैठकर
तुम जाना चाहते हो
उस पार
यह चित है मेरा
आसान नहीं
तुम्हारा प्रवेश
भावनाओं के
कोमल पल्लवों से आच्छादित
प्रेम के सुमन
खिलते हैं यहां
किसी पर्यटक को
आज्ञा नहीं
प्रवेश की
वो आए
पुष्पों से खेले
घूमे और चला जाए
यह मन है
हिंदुस्तानी का
इस प्रेम उपवन के पुष्प
खिलते हैं
केवल और केवल
हिंदुस्तानियों के लिए
हिंदुस्तान के लिए
प्राण न्यौछावर करने वाले
शहीदों के लिए
जिस दिन
इस प्रेम उपवन के
सारे पुष्प
चढ़ जाएंगे
शहीदों के चरणों में
उनकी मजारों पर
उस दिन
इन पुष्पों का
छोटा-सा जीवन
हो जाएगा सफल
महक उठेगी धरा
इनकी सुगंध से
21 टिप्पणियाँ:
nice
Bahut lajawaab .... ab lutne nahi denge apne vatan ko ...
बहुत खूब
अच्छी कविता
"मुझे तोड़ लेना बनमाली उस पथ पर तुम देना फेंक"
की याद दिलाती - भावों से सराबोर - अति सुंदर रचना
माधवजी, दिगम्बरजी, दिव्यांशुजी, रचनाजी और राकेशजी आप सबका हौसला बढ़ाने के लिए धन्यवाद
मनोहारी शब्द
और प्रभावशाली अर्थ ...
एक बहुत ही अच्छी और सार्थक रचना
अभिवादन .
इस प्रेम उपवन के
सारे पुष्प
चढ़ जाएंगे
शहीदों के चरणों में
waah waah !...kya baat hai.
Great thoughts !
zealzen.blogspot.com
.
Deshbhakti ki bhwna ki ek anokhi aur bahut sundar abhivyakti.Badhai.
Kailash C Sharma
http://sharmakailashc.blogspot.com/
www.facebook.com/kailash.c.sharma1
kavita bahut shandaar aur deshbhakti se oat-proat hai. jitani sarahana kee jaye kum hai.
मुफलिसजी, दिव्याजी, कैलाशजी और जय शंकरजी आप सभी का हार्दिक अभिनंदन और टिप्पणी कर उत्साह बढ़ाने के लिए धन्यवाद
well versed
वीना जी............ टीप्पणी करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया। देश भक्ति से ओत प्रोत रचना। बहुत खुब।
deshbhakti ka bahut hi achchha chitran. aapke blog par aai, kavitaaen padeen..ek se ek hain congrates
आप बहुत अच्छा लिखती हैं, मैंने अभी आपकी कई रचनाएं पढ़ी. सभी मन को छू गई......
मून जी, एहसास जी,ऋतु जी और शाह नवाज जी आप सबका ब्लॉग पर आकर अपनी अमूल्य राय देने व हौसला बढ़ाने का शुक्रिया...
वीणा जी आपका बहुत आभार मेरी भूल सुधार के लिए मुझे बहुत अच्छा लगा की आपने
इक सच्चे मार्गदर्शक की तरह मेरी त्रुतियों se mujhe अवगत कराया ......आपके सारे पोस्ट तरीफे काबिल हैं ....
dhanyawad
सरोज जी जीवन के किसी भी क्षेत्र में अपनी-अपनी गलतियां सुधारने में हम सबको कोई संकोच नहीं होना चाहिए...भूल सभी से होती है लेकिन सुधारते हिम्मत वाले ही हैं...ब्लॉग पर आकर आपने अपना समय दिया और उत्साह बढ़ाया बहुत-बहुत धन्यवाद
nice one
कल 10/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
बहुत सुन्दर भाव को समेटा है .अच्छी प्रस्तुति
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