सोमवार, 16 अगस्त 2010

हिंदुस्तानी का मन

यह नाविक की
कश्ती नहीं
जिस पर बैठकर
तुम जाना चाहते हो
उस पार
यह चित है मेरा
आसान नहीं
तुम्हारा प्रवेश
भावनाओं के
कोमल पल्लवों से आच्छादित
प्रेम के सुमन
खिलते हैं यहां
किसी पर्यटक को
आज्ञा नहीं
प्रवेश की
वो आए
पुष्पों से खेले
घूमे और चला जाए
यह मन है
हिंदुस्तानी का
इस प्रेम उपवन के पुष्प
खिलते हैं
केवल और केवल
हिंदुस्तानियों के लिए
हिंदुस्तान के लिए
प्राण न्यौछावर करने वाले
शहीदों के लिए
जिस दिन
इस प्रेम उपवन के
सारे पुष्प
चढ़ जाएंगे
शहीदों के चरणों में
उनकी मजारों पर
उस दिन
इन पुष्पों का
छोटा-सा जीवन
हो जाएगा सफल
महक उठेगी धरा
इनकी सुगंध से

20 टिप्‍पणियां:

माधव( Madhav) ने कहा…

nice

दिगम्बर नासवा ने कहा…

Bahut lajawaab .... ab lutne nahi denge apne vatan ko ...

दिव्यांशु भारद्वाज ने कहा…

बहुत खूब

रचना सागर ने कहा…

अच्छी कविता

बेनामी ने कहा…

"मुझे तोड़ लेना बनमाली उस पथ पर तुम देना फेंक"
की याद दिलाती - भावों से सराबोर - अति सुंदर रचना

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

माधवजी, दिगम्बरजी, दिव्यांशुजी, रचनाजी और राकेशजी आप सबका हौसला बढ़ाने के लिए धन्यवाद

daanish ने कहा…

मनोहारी शब्द
और प्रभावशाली अर्थ ...
एक बहुत ही अच्छी और सार्थक रचना
अभिवादन .

ZEAL ने कहा…

इस प्रेम उपवन के
सारे पुष्प
चढ़ जाएंगे
शहीदों के चरणों में

waah waah !...kya baat hai.

Great thoughts !

zealzen.blogspot.com
.

Kailash Sharma ने कहा…

Deshbhakti ki bhwna ki ek anokhi aur bahut sundar abhivyakti.Badhai.
Kailash C Sharma
http://sharmakailashc.blogspot.com/
www.facebook.com/kailash.c.sharma1

जय शंकर ने कहा…

kavita bahut shandaar aur deshbhakti se oat-proat hai. jitani sarahana kee jaye kum hai.

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

मुफलिसजी, दिव्याजी, कैलाशजी और जय शंकरजी आप सभी का हार्दिक अभिनंदन और टिप्पणी कर उत्साह बढ़ाने के लिए धन्यवाद

Moon Singh ने कहा…

well versed

Amit Chandra ने कहा…

वीना जी............ टीप्पणी करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया। देश भक्ति से ओत प्रोत रचना। बहुत खुब।

Unknown ने कहा…

deshbhakti ka bahut hi achchha chitran. aapke blog par aai, kavitaaen padeen..ek se ek hain congrates

Shah Nawaz ने कहा…

आप बहुत अच्छा लिखती हैं, मैंने अभी आपकी कई रचनाएं पढ़ी. सभी मन को छू गई......

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

मून जी, एहसास जी,ऋतु जी और शाह नवाज जी आप सबका ब्लॉग पर आकर अपनी अमूल्य राय देने व हौसला बढ़ाने का शुक्रिया...

saroj ने कहा…

वीणा जी आपका बहुत आभार मेरी भूल सुधार के लिए मुझे बहुत अच्छा लगा की आपने
इक सच्चे मार्गदर्शक की तरह मेरी त्रुतियों se mujhe अवगत कराया ......आपके सारे पोस्ट तरीफे काबिल हैं ....
dhanyawad

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

सरोज जी जीवन के किसी भी क्षेत्र में अपनी-अपनी गलतियां सुधारने में हम सबको कोई संकोच नहीं होना चाहिए...भूल सभी से होती है लेकिन सुधारते हिम्मत वाले ही हैं...ब्लॉग पर आकर आपने अपना समय दिया और उत्साह बढ़ाया बहुत-बहुत धन्यवाद

amrendra "amar" ने कहा…

nice one

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव को समेटा है .अच्छी प्रस्तुति