बुधवार, 22 सितम्बर 2010

ताकि बची रहे चाहत जीने की....

कुछ तो सपने
रहने दो आंखों में
जीने के लिए
केवल आंखें ही नहीं
सपनों का भी होना
आवश्यक है
जिससे अंतिम समय तक
भरी रहें उमंगें
तैरती रहे जिंदगी
मुस्कुराहटों के सागर में
बची रहे चाहत
जीने की
चिट्ठाजगत

67 टिप्पणियाँ:

अनुपमा पाठक ने कहा…

dreams give us a purpose to live.....
well expressed , veena ji!

i hv been following the melodies of ur blog....
nice to be here!
keep writing!
regards,

निर्मला कपिला ने कहा…

वीना दिल को छू गयी ये रचना। आज के वक्त मे एक भी चाहत ज़िन्दा रह सके तो जीने के लिये बहुत होती है। बधाई इस कविता के लिये।

ZEAL ने कहा…

कुछ तो सपने
रहने दो आंखों में
जीने के लिए

सपने भी जरूरी हैं..

.

यशवन्त माथुर ने कहा…

ज़िन्दगी का क्या होगा अगर ये सपने न हों?
सपने प्रेरणा देते हैं जीवन के उद्देश्य को सार्थक करने की.
वास्तव में एक मर्मस्पर्शी कविता.

shaan ने कहा…

सच कहा जीने के लिए कमसेकम एक सपने का तो होना जरूरी ही है वर्ना जीना क्या

vijay ने कहा…

इतनी छोटी कविचा में इतनी बड़ी बात कैसे लिख दी...लाजवाब

shalusri ने कहा…

तैरती रहे जिंदगी
मुस्कुराहटों के सागर में
बची रहे चाहत
जीने की
very nice ....really nice

shalusri ने कहा…

aapne thik kahaa hai ki jeene ke liye sapno ki bahut jaroorat hai...keep it up

puja ने कहा…

मैं आपका ब्लॉग फोलो कर रही हूं..और मुझे खुशी है कि मैंने ये ज्वाइन किया..लिखने में कुछ गड़बड़ हो जाए तो ध्यान मत दीजिएगा...आप सच में अच्छा लिखती हैं दीदी....

वीना ने कहा…

अनुपमा जी,निर्मला जी, ज़ील जी,यशवंत जी, शान जी, विजय जी,शालू जी, पूजा जी...आप सबका दिल से आभार

विरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा…

सुंदर और सार्थक रचना
आभार ....

M VERMA ने कहा…

सपने जीने के लिये अवलम्ब होती हैं
सुन्दर अभिव्यक्ति

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सपने ही हैं जो जीने की प्रेरणा देते हैं ..बहुत सुन्दर

Manish Kumar ने कहा…

sahi kaha...

राजेंद्र तिवारी ने कहा…

Dreams are very mystical things!!!!!

mahendra verma ने कहा…

सपनों के बिना ज़िदगी निरर्थक है..दोनों एक दूसरे के पर्याय हैं ।

नरेन्द्र व्यास ने कहा…

वाह !कितनी अच्छी रचना लिखी है आपने..! बहुत ही पसंद आई आपकी ये गहरी अभिव्यक्त..! साधुवाद !!

अमिताभ मीत ने कहा…

Waah !!!

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

सुंदर और सार्थक रचना....
बधाई इस कविता के लिये।

डॉ. नूतन गैरोला " अमृता " ने कहा…

sundar kavita... aankho me sapne bhi homa jaroori hai.vaah

डॉ. नूतन गैरोला " अमृता " ने कहा…

sundar kavita... aankho me sapne bhi homa jaroori hai.vaah

डॉ. नूतन गैरोला " अमृता " ने कहा…

sundar kavita... aankho me sapne bhi homa jaroori hai.vaah

डॉ. नूतन गैरोला " अमृता " ने कहा…

sundar kavita... aankho me sapne bhi homa jaroori hai.vaah

shikha varshney ने कहा…

बहुत खूबसूरत .जरुरी है सपने.

वीना ने कहा…

वीरेंद्र जी,वर्मा जी, गीत जी,मनीष जी, राजेंद्र जी, महेंद्र जी,नरेंद्र जी,मीत जी,मोनिका जी,नूतन जी और शिखा जी आप सबका दिल से शुक्रिया

महफूज़ अली ने कहा…

सच में सपनों का होना भी बहुत ही ज़रूरी है.... सपनें साथ रहते हैं तो जीने की चाह और बढ़ जाती है... बहुत ही सुंदर कविता...


अच्छा ! प्रोफाइल में जो एक फोटो लगी है न.... उसमें आप और बकरी का बच्चा दोनों बहुत खूबसूरत लग रहे हैं... मुझे भी जानवरों से बहुत प्यार है... बहुत सारे जानवर... गाय, कुत्ते, परिंदे और बिल्लियाँ मैंने पाली हैं.... मुझे मेरे कुत्तों से ज्यादा प्यार है... मेरा एक कुत्ता है जैंगो... वो मुझे जान से भी ज्यादा प्यारा है...

महफूज़ अली ने कहा…

आज आपका पूरा ब्लॉग देखा ...बहुत सुंदर रचनाएँ हैं... अब फौलो भी कर लिया है...

बेचैन आत्मा ने कहा…

आश बनी रहे, स्वप्न दिखते रहें यही तो जिंदगी की खूबसूरती है।
..सुंदर भाव।
..तश्वीर में आप हंस रहीं हैं लेकिन बकरी गुस्साई हुई है।

संजय भास्कर ने कहा…

nice to be here!
keep writing!.....all the best
regards,
sanjay

राजभाषा हिंदी ने कहा…

सपने ही तो हमें गतिशील रखते हैं। बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
अलाउद्दीन के शासनकाल में सस्‍ता भारत-2, राजभाषा हिन्दी पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें

ana ने कहा…

bahut achchhi prastuti...........man moh liya

मेरे भाव ने कहा…

कुछ तो सपने
रहने दो आंखों में
जीने के लिए
ek jiwant rachna ke liye jindadili se badhai sweekaren...

वीना ने कहा…

महफूज़ जी तारीफ के लिए शुक्रिया। मैने बहुत प्यारी-प्यारी चिडि़या पाली है। एक छोटा-सा कछुआ है जिसका नाम टुल्लु है। पहले एक तोता भी पाला था। सारी चिड़ियों के नाम हैं। मुझे इंसान से ज्यादा जानवरों से प्यार है...वो प्यार समझते हैं। जिसमें इंसानी दिमाग की मिलावट नहीं होती...अच्छा लगा जानकर कि आपको भी जानवरों से प्यार है...उनके साथ समय बिताना सबसे खूबसूरत क्षण....

Vijai Mathur ने कहा…

Veena ji,
Jeewan me SAPNE hi aagey badhney ki RAH dikhatey hai.

वीना ने कहा…

बेचैन जी हम लोग 2007 में इंदौर में रहते थे तब एक बार ओंकारेश्वर गए थे। ओंकारेश्वर जिस पहाड़ी पर है उसके चारों ओर नर्मदा बहती है वहां एक जगह संगम है, जहां पहाड़ी के दोनो तरफ से आने वाली नर्मदा की धाराएं मिलती हैं वहां मुझे यह बच्चा मिला। पहले मैने कोशिश की कि मैं पकड़ूं मगर पकड़ नहीं पाई फिर वो एक घर में घुस गया वहां एक लड़की ने पकड़कर दिया। वो इसीलिए गुस्सा है क्योंकि वो बच्चा भाग-भागकर थक गया था, मैं इस लिए खुश हूं और हंस रही हूं कि जो बच्चा इतना प्यारा लग रहा था वो मेरी गोदी में था।

वीना ने कहा…

संजय जी, राजभाषा, एना, मेरे भाव और विजय जी आप सभी का दिल से आभार...उम्मीद है आगे भी मेरी रचनाओं पर टिप्पणी करके मेरा मार्ग दशर्न व उत्साह वर्धन करते रहेंगे

माधव ने कहा…

सुन्दर

mridula pradhan ने कहा…

bahot sunder.

Ravish Tiwari (रविश तिवारी ) ने कहा…

Uttam, bahut uttam

baba108 ने कहा…

वाह अति उत्तम

Anita ने कहा…

आपका ब्लॉग बहुत जीवंत लगा, बधाई! कविता भी बहुत सुंदर है.

वन्दना ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति।

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

जीने के लिए सपने और चाहत दोनों जरूरी है, बढ़िया भाव !

वीना ने कहा…

माधव नन्हे-मुन्ने, मृदुला जी, रविश जी, बाबा जी,अनीता जी, वंदना जी, गोदियाल जी आप सबका आना मुझे बहुत अच्छा लगा....धन्यवाद

Kailash C Sharma ने कहा…

सपने ही आदमी को जीने की प्रेरणा देते हैं...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति....

sandhyagupta ने कहा…

इस छोटी सी रचना में एक बड़ा दर्शन छुपा है.शुभकामनाएं.

राजकुमार सोनी ने कहा…

आपकी कविता बहुत ही अच्छी है
आंखो से बहुत कुछ देखा जा सकता है लेकिन लेकिन सपनों से भरी आंखे कुछ बेहतर देखती है।
आपको बधाई

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
आभार, आंच पर विशेष प्रस्तुति, आचार्य परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पधारिए!

अलाउद्दीन के शासनकाल में सस्‍ता भारत-2, राजभाषा हिन्दी पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें

hemabh ने कहा…

very nice poem
Just like earlier one

खुश ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
खुश ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
खुश ने कहा…

सपनों का ही दूसरा नाम जीवन है। यदि आंखों में सपने नहीं तो जिंदगी कहां? बहुत अच्छी कविता है...
visit www.khucee.blogspot.com

संतोष कुमार ने कहा…

जीने के लिए सपने उतने ही जरूरी है, जितना हमारा सांस लेना ! बिना सपनो के जिंदगी जीना जिंदगी को धोका देना है ! बहुत ही अच्छी कविता वीणा जी और मेरे ब्लॉग पर आने का आपका बहुत बहुत शुक्रिया ! आपकी सारी रचना अतिउत्तम हैं !

Apanatva ने कहा…

so true........
amazing.

सुनीता शानू ने कहा…

वीणा जी,
कुछ तो सपने
रहने दो आंखों में
जीने के लिए
बहुत सुन्दर कविता है। धन्यवाद ब्लॉग पर आने के लिये मै भी आनन्द ले पाई आपकी सुन्दर रचना का।

Babli ने कहा…

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

सचमुच, जीने के लिए सपने बहुत जरूरी हैं।

शोभना चौरे ने कहा…

bahut sundar skaratmk vichar

Ramu ने कहा…

पाश ने भी कहा है...
....सबसे खतरनाक होता है हमारी आंखों में सपनों का मर जाना.

सत्यप्रकाश पाण्डेय ने कहा…

सुंदर रचना.

किसी ब्लॉग को फॉलो करें ब्लॉगर प्रोफाइल के साथ

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

bahut achchha laga yahan aakar

गजेन्द्र सिंह ने कहा…

अच्छी पंक्तिया की रचना की है ........

कृपया इसे भी पढ़े :-
क्या आप के बेटे के पास भी है सच्चे दोस्त ????

राजेंद्र तिवारी ने कहा…

waiting for your new post.

इमरान अंसारी ने कहा…

वीणा जी,

आप हमारे ब्लॉग पर आईं और अपनी बेशकीमती राय से नवाज़ा और हौसलाफजाई की उसके लिए मैं तहेदिल से आपका शुक्रिया अदा करता हूँ........आप जैसे कद्रदानो की वजह से इस खाकसार ने ये ब्लॉग बनाने की जुर्रत की है .........उम्मीद करता हूँ आप आगे भी ऐसे ही हौसला बढाती रहेंगी........एक बार फिर आपका शुक्रिया|

अब बात वीणा के सुर की .......वीणा जब भी बजती है अगर उसको बजाने वाले हाथों की उँगलियों में जादू हो तो वीणा के तार दिल को छूते हैं.......ऐसे ही आपके ब्लॉग की पोस्ट सीधे दिल को छूती है ...सच है बिना सपनो के जीवन ऐसा ही है जैसे बिना शाखों का पेड़.........पर तस्वीर का एक रुख और भी है जब सपने हकीक़त के ठोस धरातल पर गिर कर चकना चूर होते है तो वो तकलीफ बताई नहीं जा सकती ..........खैर अच्छा और बुरा तो सबके साथ है ...........आपके ब्लॉग को फॉलो करके मैं खुद को गौरान्वित महसूस करूँगा |

Dr.Ajeet ने कहा…

उम्दा शिल्प भी सम्वेदना भी...

डा.अजीत

Mansoor Ali ने कहा…

सुन्दर कविता,
आँखों और सपने की बात पर किसी की कही हुई ये बात भी याद हो आई कि "सपनो के लिए नींद ज़रूरी है, मगर एसा 'सपना'
देखो कि जिससे 'नींद' उड़ जाए."
"अदब नवाज़ " पर आने के लिए शुक्रिया.
please visit : http://aatm-manthan.com
mansoor ali hashmi

mridula pradhan ने कहा…

bahut sunder.