सोमवार, 27 सितम्बर 2010

परीक्षा....मेरी-तुम्हारी

मैं

जिस राह भी गई

हर राह में

खड़े थे तुम

घनी छांव में भी

तुम मिले

धूप की

तपती बारिश में भी

तुम थे वहां

बरखा की

जलती फुहारों के बीच भी

गुनगुना रहे थे तुम

थककर चूर हुई

और सोई

तो ख्वाब-सा

बुन रहे थे तुम

पथरीले रस्ते पर

लहू-लुहान हुई

तब भी साथ थे तुम

जिन राहों पर

जीकर मरती रही

वहां भी

साथ थे तुम

आज हूं

उस रास्ते पर

जो ले जाता है

जिंदगी को

अंतिम सच्चाई तक

आज है परीक्षा

मेरी और तुम्हारी

मैं मिल जाऊंगी

अंतिम सच्चाई से

तुम्हारे साथ

या... तुम्हारे बिना

पूरा करूंगी

अंतिम सफर

64 टिप्पणियाँ:

यशवन्त माथुर ने कहा…

सच्चा साथी वही है जो हर सुख दुःख में साथ हो.पर शायद कहीं तो बिछुड़ना पड़ता है.

shalusri ने कहा…

मैं मिल जाऊंगी

अंतिम सच्चाई से

तुम्हारे साथ

या... तुम्हारे बिना

पूरा करूंगी

अंतिम सफर

बहुत अच्छी कविता....प्यार के वायदे के साथ क्या बात है

shalusri ने कहा…

मैं मिल जाऊंगी

अंतिम सच्चाई से

तुम्हारे साथ

या... तुम्हारे बिना

पूरा करूंगी

अंतिम सफर

बहुत अच्छी कविता....प्यार के वायदे के साथ क्या बात है

vijay ने कहा…

चाहत जरूर होती है अंत समय तक साथ निभाने की मगर ऐसा होता कहां है....आप जितनी सुंदर हैं उतनी ही सुंदर आपकी कविता.. फोटो में आप बहुत ही खूबसूरत लग रही हैं...अंयथा न लें। आपकी और भी रचनाएं पढ़ी है कुछ तो बात है आपमें...

रश्मि प्रभा... ने कहा…

jo hamesha saath raha to phir pariksha kaisi, kiski....saath hi hoga aakhiri safar... shareer se alag

अनुपमा पाठक ने कहा…

sundar ehsaason ko piroti kavita..
antim satya pane tak , aur uske baad bhi saath ke dor talaashti
sumadhur sur si kavita..
subhkamnayen!

निर्मला कपिला ने कहा…

जब हर घडी साथ है तो अन्तिम यात्रा मे भी साथ ही होगा चाहे छाँव हो या ज़िन्दगी की धूप जो दिल मे बसे होते हैं वो साथ ही जाते हैं जैसे अब जा रहे हैं शरीर क्या--- मिलन तो आत्माओं का होना चाहिये--- दिल की गहन पीडा को शब्दों मे अच्छा पिरोया है----
मैं मिल जाऊंगी

अंतिम सच्चाई से

तुम्हारे साथ

या... तुम्हारे बिना

पूरा करूंगी

अंतिम सफर
शुभकामनायें

वीना ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
वीना ने कहा…

सच है यशवंत जी कहीं न कहीं बिछड़ना तो है ही...विजय जी...आपने कविता के साथ चित्र की भी तारीफ की धन्यवाद...कुछ गलत नहीं ले रही..सीमा में रहते तारीफ करना गलत नहीं,रश्मि जी,अनुपमा जी आपका धन्यवाद, निर्मला जी आपने एकदम सही कहा मिलन दो आत्माओं का होता है..पर दिल कहां मानता है..शालू जी आपका भी धन्यवाद

Apanatva ने कहा…

bahut bhavuk sath hee yatharth ko sath liye sunder abhivykti...

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत अच्छा लिखती है आप ..बहुत पसंद आई आपकी यह रचना ..

रचना दीक्षित ने कहा…

ये सच है जीवन भर का साथ कभी तो छोड़ना पड़ता है ,पर जीवन के उस पार भी शायद एक जीवन है. अच्छी प्रस्तुति.

संजय भास्कर ने कहा…

वीना जी
....बहुत अच्छा लिखती है आप

संजय भास्कर ने कहा…

वाह !कितनी अच्छी रचना लिखी है आपने..! बहुत ही पसंद आई

Ramu ने कहा…

निराकार प्रेम की अभिव्यक्ति का अच्छा प्रयास आपकी रचनाओं में दिखाई देता है।

कविता रावत ने कहा…

मैं मिल जाऊंगी
अंतिम सच्चाई से
तुम्हारे साथ
या... तुम्हारे बिना
पूरा करूंगी
अंतिम सफर
.....एक सचाई बयां करती मानवीय मनोभावों की सुन्दर अभिव्यक्ति

Kailash C Sharma ने कहा…

मैं मिल जाऊंगी

अंतिम सच्चाई से

तुम्हारे साथ

या... तुम्हारे बिना

पूरा करूंगी

अंतिम सफर .....
बहुत ही भावुक कर दिया आपकी कविता ने....जीवन साथी के साथ छोड़ने की कल्पना से ही मन डरने लगता है.....पर प्रकृति के नियम या नियति को कौन बदल सकता है....बस एक विश्वास रहता है की यात्रा के दूसरे चरण में किसी पड़ाव पर मिलेंगे ज़रूर......बहुत भावुक रचना....आभार...

puja ने कहा…

मैं मिल जाऊंगी

अंतिम सच्चाई से

तुम्हारे साथ

या... तुम्हारे बिना

पूरा करूंगी

अंतिम सफर

इसी को कहते हैं साथ जीना, साथ मरना...साथ जीना तो होता है पर अंतिम सफर साथ तय करना...ऐसा कहां हो पाता है। फिर ये पुरुष कहां सोचते हैं अगर किसी को ऐसा जीवन साथी नसीब हो तो क्या कहने। कमसेकम सोचता तो हो। आपकी रचनाएं पढ़कर ये लगता है कि आपके जीवनसाथी आपको बहुत प्यार करते हैं। वर्ना भावनाएं ऐसी न होती। ईश्वर ये प्यार बनाए रखे...

puja ने कहा…

मुझे आपकी कविता उल्टी दिशा बहुत अच्छी लगी थी और प्यार के नाम खत.मत बनाओ गगन का चांद तो गजब की रचनाएं थीं...आपको बार-बार पढ़ने का मन करता है

Sunil Kumar ने कहा…

दिल को छू लेने वाली रचना, बधाई

Shekhar Suman ने कहा…

bahut hi khubsurat rachna...
maza aa gaya...

महफूज़ अली ने कहा…

पहली पंक्तियों ने ही मन को छू लिया.... कितनी गहराई से और दिल से आपने लिखा है... बहुत ही सुंदर....

संगीता पुरी ने कहा…

वाह ..

बहुत सुंदर !!

VIJAY KUMAR VERMA ने कहा…

BAHUT HEE KHOOBSURAT POST

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

अच्छी रचना लिखी है.....बहुत पसंद आई प्रस्तुति

ओशो रजनीश ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति .......
अच्छी पंक्तिया लिखी है ........

जाने काशी के बारे में और अपने विचार दे :-
काशी - हिन्दू तीर्थ या गहरी आस्था....

अगर आपको कोई ब्लॉग पसंद आया हो तो कृपया उसे फॉलो करके उत्साह बढ़ाये

वीना ने कहा…

अपनत्व, रंजू जी,रचना जी, संजय जी,रामजी, कविता जी,कैलाश जी, सुनील जी, शेखर जी आप सबका दिल से आभार

वीना ने कहा…

महफूज जी,संगीता जी, विजय जी,डा.मोनिका, ओशो रजनीश जी आप सबका दिल से आभार व्यक्त करती हूं....आपने जो उत्साह बढ़ाया उसके लिए धन्यवाद

वीना ने कहा…

पूजा जी आपने मेरी रचनाओं की प्रशंसा कर जो मेरा हौसला बढ़ाया उसके लिए धन्यवाद...आपने जो कहा है ठीक है वैसे भी जब तक जीवनसाथी का सहयोग न हो तब तक सफर कटता तो है पर मजेदार नहीं होता...

शरद कोकास ने कहा…

अच्छी रचना है ।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा रचना!!

राजकुमार सोनी ने कहा…

माफ करिएगा
यह मेरे निजी विचार ही है
मैं किसी भी सफर को अंतिम सफर मानने का पक्षधर नहीं हूं
एक सफर खत्म होता है तो दूसरा शुरू हो जाता है
कोई यात्रा शायद अंतिम यात्रा नहीं होती
चलते रहने का नाम ही शायद जिन्दगी है

आपकी रचना अच्छी है
ऊपर जो कुछ मैंने लिखा है वह आग्रह/ निवेदन/ सुझाव जैसा ही कुछ मान लें
इतनी अच्छी बकरी के बच्चे के साथ खुश दिखने वाली एक बेहतर कवियित्री निराश कैसे हो सकती है यह समझ में नहीं आया.

Vijai Mathur ने कहा…

Apki yah kavita goodh evam darshnik hai.Ant me Atma ke sath SOOCHMA SHARIR tatha KARAN SHARIR Atma ke sath uskey karmon ka Lekha -Jokha liye chaltey rahtey hai jab tak ki MOCH na mil jaye.

इमरान अंसारी ने कहा…

शानदार रचना है वीना जी......यहाँ पर मैंने 'तुम' का अर्थ खुदा से लिया है जिससे ये कविता सूफियाना रंग लेकर रूह तक उतर गयी ................बधाई इस रचना पर |

विवेक सिंह ने कहा…

कविता अच्छी लगी । भावभीनी ।

Anita ने कहा…

बहुत सुंदर शब्द व भाव ! आपका अंदाज उत्साह से भर देता है, बधाई!

माधव ने कहा…

दिल को छू लेने वाली रचना,

वीना ने कहा…

सोनी जी आपने यहां आकर जो उत्साह बढ़ाया उसके लिए दिल से आभार...आपका कहना सही है कि कोई सफर अंतिम नहीं होता...लेकिन जीवन के अंत को अंतिम सफर ही करार दिया गया है...अंतिम सफर इस भौतिक शरीर का जिसे हमारी शख्सियत जुड़ी है...इसके बाद क्या होगा वो तो किसी को नहीं पता...लेकिन एक कहानी, एक फसाने का अंत जिससे व्यक्ति विशेष जुड़ा होता है...और एक व्यक्ति होने के कारण छोटी-सी मेरी अभिलाषा...बस...और कुछ नहीं, वैसे भी यही आत्मा-परमात्मा का मिलन भी है। उम्मीद है आगे भी स्नेह बनाए रखेंगे...

वीना ने कहा…

सोनी जी आपने यहां आकर जो उत्साह बढ़ाया उसके लिए दिल से आभार...आपका कहना सही है कि कोई सफर अंतिम नहीं होता...लेकिन जीवन के अंत को अंतिम सफर ही करार दिया गया है...अंतिम सफर इस भौतिक शरीर का जिसे हमारी शख्सियत जुड़ी है...इसके बाद क्या होगा वो तो किसी को नहीं पता...लेकिन एक कहानी, एक फसाने का अंत जिससे व्यक्ति विशेष जुड़ा होता है...और एक व्यक्ति होने के कारण छोटी-सी मेरी अभिलाषा...बस...और कुछ नहीं, वैसे भी यही आत्मा-परमात्मा का मिलन भी है। उम्मीद है आगे भी स्नेह बनाए रखेंगे...

वीना ने कहा…

शरद जी,उड़न तश्तरी जी, विवेक जी, इमरान जी, विजय जी, अनीता जी और नन्हे माधव आप सभी का आभार

विवेक मिश्र ने कहा…

बहुत अच्छी कविता....

Shah Nawaz ने कहा…

बेहद खूबसूरत रचना है जी..... बहुत खूब!

राजभाषा हिंदी ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
काव्य प्रयोजन (भाग-१०), मार्क्सवादी चिंतन, मनोज कुमार की प्रस्तुति, राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

JAY SHANKER PANDEY ने कहा…

वीना जी बिलकुल सही. भविष्य कौन जानता है. कौन जानता है कि कौन कितनी दूर तक साथ चलेगा . वैसे उस पार तो सुनते हैं कि सफ़र अकेले ही तय करना पड़ता है. बहुत खूब

ZEAL ने कहा…

बहुत अच्छी कविता !

Babli ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना लिखा है आपने जो प्रशंग्सनीय है! बधाई!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

शायद अंतिम सफ़र तो अकेला ही पूरा करना पढ़ता है ... अपने कर्मों के साथ ....
बहुत ही लाजवाब कविता है आपकी ... गहरे भाव लिए ...

manohar chamoli manu ने कहा…

sundr. main blog pr nya hun... abhi jyada kuch visesh nhi likh rha hun.

manohar chamoli manu ने कहा…

sunder.

manohar chamoli manu ने कहा…

sunder.

चौपटिया ROCKS ने कहा…

sundar

Dr.Ajeet ने कहा…

काश! ऐसा साथी सबको मिलें..
बडी मुश्किल से मिलता है अधुरेपन का मसला इतनी जल्दी हल नही होता...

आभार
डा.अजीत

'साहिल' ने कहा…

मैं मिल जाऊंगी

अंतिम सच्चाई से

तुम्हारे साथ

या... तुम्हारे बिना

पूरा करूंगी

अंतिम सफर ..


bahut hi bhaavuk aur acchhi kavita hai..

सुरेन्द्र बहादुर सिंह " झंझट गोंडवी " ने कहा…

bhavpoorn sunder rachna
padhkar bahut achchha laga

ज्योति सिंह ने कहा…

मैं मिल जाऊंगी

अंतिम सच्चाई से

तुम्हारे साथ

या... तुम्हारे बिना

पूरा करूंगी

अंतिम सफर
umeedo par tiki jeevan ki sachchai chhupi hai is rachna ,wakai sundar likha hai ,badhai aapko .

NK Pandey ने कहा…

वीणा जी बहुत अच्छा लगता है आपको पढ़ना। आपकी कविताओं से सच्चाई झलकती है।

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

अंतिम सच्चाई तक जो साथ दे वही सच्चा साथी ।
सुंदर रचना ।

मोहिन्दर कुमार ने कहा…

सुन्दर भाव भरी रचना.... पहली बार आपके ब्लोग पर आपकी टिप्पणी के माध्यम से पंहुचा अब आना जाना लगा रहेगा

यशवन्त माथुर ने कहा…

आप सभी को हम सब की ओर से नवरात्र की ढेर सारी शुभ कामनाएं.

deepak saini ने कहा…

pyar ki sachchi paribhasha

vishal ने कहा…

मैं मिल जाऊंगी

अंतिम सच्चाई से

तुम्हारे साथ

या... तुम्हारे बिना

पूरा करूंगी

अंतिम सफर

बहुत खूब वीणा जी! :))

Anjana (Gudia) ने कहा…

wah! bahut sunder!

Vicky Babu ने कहा…

Meri rachna "Is Baar Giregi Dhundh" aur aapki ye kavita dono ek dusre ki poorak lagi mujhe.

badhai dena chahunga khud ko hi,
Bahut achhi rachna.

Vicky Babu ने कहा…

Aapki kavita padh kar Bachchan J ki kavita "Is paar us paar" yaad aa gayi.

"Is paar priye madhu hai tum ho,
us paar na jane kya hoga..."

Kahin kahin Mahadevi Ji ka bhi khayal aa jata hai.pat nhi kya hai aapki is rachna me.baar baar dil karta h padhne ko.

Aabhaar....