आज मैं कोई रचना नहीं पोस्ट कर रही हूं बल्कि इस ब्लॉग जगत को लेकर कुछ और विचार आपसे बांटना चाहती हूं...। हालांकि मैंने काफी पहले ब्लॉग बनाया था और बनाकर कुछ खास पोस्ट नहीं किया....मगर पांच-छ: महीने पहले ही सक्रिय हुई हूं...यानि दोबारा ब्लॉग जगत से जुड़ी हूं...मुझे कुछ बहुत अच्छे दोस्त मिले, कुछ रिश्ते मिले....प्यार मिला, अपनापन मिला और परेशानी में जिस तरह सबने साथ दिया उसे मैं कभी न भूल पाऊंगी, न ही उसका एहसान चुका पाऊंगी....मगर मेरी कुछ लोगों से शिकायत है। नाम लेकर मैं न उन्हें शर्मिंदगी देना चाहती और न खुद ही उनके स्तर पर जाना चाहती ....यह उनका तरीका भी हो सकता है....मगर मैं क्या ऐसे कई लोगों से मेरी बात हुई है जिन्होने इस तरीकों को गलत ठहराया है। जब मैं दोबारा सक्रिय हुई तो तमाम लोगों ने रचनाओं पर टिप्पणी की....कुछ लोगों की टिप्पणी बार-बार आई और तब तक आती रहीं जब तक मैं उनके ब्लाग की फॉलोअर नहीं बन गई और जब मैने ब्लॉग फॉलो कर लिया तो रचनाएं देखनी ही बंद कर दी, इधर से रुख ही मोड़ लिया। मैने तो उन ब्लॉग पर जाकर कहा भी मगर ढाक के तीन पात.....उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा। मैं चाहती तो कुछ उनके ब्लॉग पर कुछ टीका-टिप्पणी कर सकती थी या उस ब्लॉग से अलग भी हो सकती थी मगर मैं उस स्तर पर नहीं जाना चाहती। मेरी अपनी जगह है, पहचान है...जो रहनी ही चाहिए और हमने तो रचनाएं देखी थीं किसी व्यक्ति विशेष को नहीं। इसलिए ब्लॉग फॉलो किया था... इसमें रचनाओं का क्या दोष...अच्छे लेखन की तारीफ होनी ही चाहिए... किसी व्यक्ति विशेष से मतलब नहीं था लेकिन आज इतना जरूर कहूंगी कि अगर आपमें से किसी को भी किसी व्यक्ति की रचना पसंद आती है तो उस ब्लॉग को जरूर फॉलो करिए। इससे न केवल उत्साह बढ़ता है ..हो सकता है आप किसी के बहुत अच्छे मित्र बन जाएं ..कोई आपका मित्र बन जाए या अंजाने ही सही आपकी प्रेरणा उसमें नया उत्साह-नई उमंग भर दे...आप कहीं उसकी मरती आशाओं को जीवन दे दें.....और अपने फॉलोअर को आप भी न भूलें....अगर आपके ब्लॉग पर आकर कोई अपनी राय देता है तो आपका भी फर्ज बनता है कि आप भी अपनी राय उनकी रचनाओं पर जरूर दें...और पसंद आने पर फॉलो जरूर करें, फॉलोअर की बढ़ती संख्या एक अलग तरह का आत्म विश्वास देती है........ इससे आप रचना का सम्मान करेंगे और रचनाकार को इस सम्मान के अलावा क्या चाहिए.......कम से कम यह मत करिए कि तब तक जाकर उस ब्लॉग पर टिप्पणी करिए जब तक वह आपको फॉलो न कर ले और जब फॉलो कर ले तो आप उस ब्लॉग को ही भूल जाएं । मेरा कहने का आशय यह है कि इतने मतलबी न बनें... राय देने से दूसरे का हौसला बढ़ता है और मन को भाता भी है....
पिछले सप्ताह वायरल की वजह से ज्यादा समय नहीं दे पाई और कल एक सप्ताह के लिए बाहर जा रही हूं वापस आकर सबके ब्लॉग पर अपनी उपस्थिति जरूर दर्ज कराऊंगी....तब तक नमस्कार...ईश्वर आप सबको खुश रखे...
शनिवार, 15 जनवरी 2011
मंगलवार, 28 दिसंबर 2010
हताशा ........वीना
कितना हताश था
वह ऑटो चालक
टूटा-सा, बिखरा-सा
पैसे कमाने की धुन में
भूल गया था भूख
भूखा पेट, वीरान आंखें
अनर्थ की आशंका
सुबह से
इकट्ठा कर रहा था
रुपये
खुद मंजिल से दूर
पहुंचा रहा था दूसरों को
उनकी मंजिलों तक
गिड़गिड़ाया बहुतों के आगे
डॉक्टरों से भी मिन्नत की
मौत को हर पल
देख रहा था पास आते
अपनी गुमसुम आंखों से
उसे नहीं मिल पा रहा था खून
अपने बेटे के लिए
जिसे था कैंसर
उसके पास रुपये नहीं थे
लोगों के पास इंसानियत
वह ऑटो चालक
टूटा-सा, बिखरा-सा
पैसे कमाने की धुन में
भूल गया था भूख
भूखा पेट, वीरान आंखें
अनर्थ की आशंका
सुबह से
इकट्ठा कर रहा था
रुपये
खुद मंजिल से दूर
पहुंचा रहा था दूसरों को
उनकी मंजिलों तक
गिड़गिड़ाया बहुतों के आगे
डॉक्टरों से भी मिन्नत की
मौत को हर पल
देख रहा था पास आते
अपनी गुमसुम आंखों से
उसे नहीं मिल पा रहा था खून
अपने बेटे के लिए
जिसे था कैंसर
उसके पास रुपये नहीं थे
लोगों के पास इंसानियत
लेबल:
इंसानियत,
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हताशा
बुधवार, 22 दिसंबर 2010
प्यार का दामन....वीना
मन को बांधो
भावनाएं साथ चलेंगी
ह्रदय भरेगा उड़ान
रोशनी के
ह्रदय भरेगा उड़ान
रोशनी के
किनारे होंगे
दीपों की राह पर
हौसलों के कदम होंगे
किरणों के धागे
बांधेगे नया जीवन
चांदनी को पीते जाओ
तृप्ति की बूंद तक
कण-कण में
रचते-बसते हुए
मिल जाए कहीं अगर
प्यार का दामन
दो दिशाएं भी
साथ चलेंगी
दीपों की राह पर
हौसलों के कदम होंगे
किरणों के धागे
बांधेगे नया जीवन
चांदनी को पीते जाओ
तृप्ति की बूंद तक
कण-कण में
रचते-बसते हुए
मिल जाए कहीं अगर
प्यार का दामन
दो दिशाएं भी
साथ चलेंगी
लेबल:
कश्ती,
प्यार का दामन. दिशाएं,
भावनाएं,
मन
बुधवार, 1 दिसंबर 2010
अंजाम-ए-मुहब्बत क्या होगा.....वीना
अंजाम-ए-मुहब्बत क्या होगा, जब दिल ही हम यूं लगा बैठे
अब आगे न जाने क्या होगा, हम ऐसी नादानी कर बैठे
शम्मा ही चली खुद जलने को, परवाने को तोहमत क्यूं दें हम
गुस्ताखी करी खुद शम्मा ने, परवाने को क्यूं तरसा बैठे
वादों के तसव्वुर में खोकर, यादों को सजाया है हमने
यादें ही तो हैं जीवन में, यादों पर हम भी जी बैठे
इश्क ईमान है इश्क अरमान है इश्क में हम सब बस इंसान हैं
इश्क में वीना ने जो सजदा किया ऐ खुदा हम तुझको भुला बैठे
अब आगे न जाने क्या होगा, हम ऐसी नादानी कर बैठे
शम्मा ही चली खुद जलने को, परवाने को तोहमत क्यूं दें हम
गुस्ताखी करी खुद शम्मा ने, परवाने को क्यूं तरसा बैठे
वादों के तसव्वुर में खोकर, यादों को सजाया है हमने
यादें ही तो हैं जीवन में, यादों पर हम भी जी बैठे
इश्क ईमान है इश्क अरमान है इश्क में हम सब बस इंसान हैं
इश्क में वीना ने जो सजदा किया ऐ खुदा हम तुझको भुला बैठे
सोमवार, 15 नवंबर 2010
काफी समय बाद.....मैं और तुम.......वीना
काफी लम्बे समय बाद आपके सबके साथ हूं.....कुछ परेशानियों के बाद.....यह गीत भी मैने मंच पर पढ़ा है....इसी गीत के साथ हाजिर हूं...
रात नशीली मैं और तुम
यूं ही जागें मैं और तुम
कंगना खनके पायल छनके
प्रेम में डूबे मैं और तुम
पुरवइया के झोंके आए
आंचल तेरा यूं लहराए
मन काबू न रह पाए
संग में जागें मैं और तुम
फूलों के रंग में रंग तेरा
प्यार की धुन में स्वर तेरा
तू भी झूमें, मैं भी झूमूं
कैसे संभले मैं और तुम
चंदन वन की खुशबू तू
मस्त पवन की चंचल तू
धड़कन बोले मनवा डोले
दूर रहें न मैं और तुम
इतनी दूरी क्यों है सनम
शर्म-हया को छोड़ो तुम
तुम भी बहकी मैं भी बहका
संग-संग बहकें मैं और तुम
गुरुवार, 21 अक्टूबर 2010
मेरे बेटे का अभी ........वीना
सभी ब्लॉगर मित्रों को देर से ही सही दशहरा और दुर्गा पूजा उत्सव की बधाई। अष्टमी को मेरे बेटे का ऑपरेशन था इसलिए न ही मैं कुछ लिख पाई और नहीं आप सबको बधाई ही दे पाई। जब तक वो पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता मैं शायद ही कुछ लिख पाऊं और आप सबकी सुंदर और अच्छी रचनाएं पढ़ पाऊं। उसके ठीक होते ही मैं पुन: सक्रिय होऊंगी....सादर...
सोमवार, 4 अक्टूबर 2010
दिल का दीवानापन............वीना
अब मैं आपको कुछ गीत और गज़ल पढ़वाऊंगी जिन्हे मैने मंच पर पढ़ा.....
दिल का दीवानापन
मत पूछ ऐ सनम
ये हो चुका है तेरा
तेरा है मेरा मन
राह-ए-वफा पे अब से
पहले न चले थे
पीछे न कभी आएंगे
बढ़ते हुए कदम
यूं अब जो मिले हैं तो
हम मिलते ही रहेंगे
टूटे न कभी तेरे-मेरे
प्यार की सरगम
फुर्सत के ये लम्हे हैं
मिले न मिलें कभी
दो-चार घड़ी और हैं
क्यूं दूर रहें हम
अब जिंदगी की राह में
अकेले नहीं हो तुम
वीना तो तेरी हो चुकी है
ऐ मेरे हमदम
दिल का दीवानापन
मत पूछ ऐ सनम
ये हो चुका है तेरा
तेरा है मेरा मन
राह-ए-वफा पे अब से
पहले न चले थे
पीछे न कभी आएंगे
बढ़ते हुए कदम
यूं अब जो मिले हैं तो
हम मिलते ही रहेंगे
टूटे न कभी तेरे-मेरे
प्यार की सरगम
फुर्सत के ये लम्हे हैं
मिले न मिलें कभी
दो-चार घड़ी और हैं
क्यूं दूर रहें हम
अब जिंदगी की राह में
अकेले नहीं हो तुम
वीना तो तेरी हो चुकी है
ऐ मेरे हमदम
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