इसी का नाम जिंदगी है ये
हमेशा एक-सी नहीं रहती
दिन खो जाता है शाम में, रात
तक सुबह नहीं पलती
जहां के आगे मिलेंगे और भी
जहां, खोजो तो सही
कदम साथ बढ़े साथियों के तो
दूरी नहीं खलती
अक्सर थम जाते हैं काफिले
कुछ दूर बढ़ने के बाद
रुके हुए कदमों के साथ कभी
जिंदगी नहीं चलती
अफसाने बदल जाते हैं हकीकत
में समय के साथ
साथ हो तेरी रहनुमाई तो लम्बी
डगर नहीं खलती
अफसुर्दा दिलों में कैसे
खुशियों की शहनाई बजे
वाबस्तगी से महरूम दामन में
जीस्त नहीं पलती
मेरे चांद में मेरे अरमानों
की पूरी दुनिया आबाद है
खाली आस्मां के नीचे
खाली-सी जिंदगी नहीं पलती


