शुक्रवार, 16 जुलाई 2010

संवादहीनता.... पीढ़ियों के बीच

संवादहीनता
आज बच्चों को
कर रही है दूर
अपनी मिट्टी
अपने लहू से
संवाद
तय कर रहे हैं पथ
सुनसान गलियों में
चक्कर लगा रहे हैं
बीहड़ों-जंगलों में
भटककर

हो रहे हैं दूर हमसे
अन्वेषी मन
जानना चाहता है
ये संसार
अपनी तरह से
उन्हे अधिकार है
जानने का
हमारा कर्तव्य है
सही दिशा बताने का
आवश्कता है
संवादों को पालने की
दोस्ती और प्यार से
जेनेरेशन गैप को

मिटाने की
अपनेपन की
ढाल के साथ
संवादों को
हथियार बनाने की
तभी इस युद्ध में
विजयी होंगी
दोनों पीढ़ी
पट सकेगी खाई
बीच की
उन्हे मिलेगा
उज्जवल भविष्य
सही दिशा
और हमें
संतुष्टि

8 टिप्‍पणियां:

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

धन्यवाद माधव जी

खामोश फ़लक ने कहा…

कविता में जेनेरेशन गैप पर अंतर्दृष्टि और संवेदना का अदभुत संगम देखने को मिलता है. ढेरों शुभ कामनाएं.

Archana Chaoji ने कहा…

संवादहीनता.....हर समस्या की जड..........

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बिलकुल सही कहा है ..

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

आवश्कता है
संवादों को पालने की
दोस्ती और प्यार से
जेनेरेशन गैप को


एक दम १६ आने सच.

बहुत सुंदर सोच.

रोली पाठक ने कहा…

बहुत बढ़िया रचना...एकदम यथार्थ...

नीरज गोस्वामी ने कहा…

बेहतरीन रचना..बधाई
नीरज

Harshita Joshi ने कहा…

bahut badhiya........