संवादहीनता
आज बच्चों को
कर रही है दूर
अपनी मिट्टी
अपने लहू से
संवाद
तय कर रहे हैं पथ
सुनसान गलियों में
चक्कर लगा रहे हैं
बीहड़ों-जंगलों में
भटककर
हो रहे हैं दूर हमसे
अन्वेषी मन
जानना चाहता है
ये संसार
अपनी तरह से
उन्हे अधिकार है
जानने का
हमारा कर्तव्य है
सही दिशा बताने का
आवश्कता है
संवादों को पालने की
दोस्ती और प्यार से
जेनेरेशन गैप को
मिटाने की
अपनेपन की
ढाल के साथ
संवादों को
हथियार बनाने की
तभी इस युद्ध में
विजयी होंगी
दोनों पीढ़ी
पट सकेगी खाई
बीच की
उन्हे मिलेगा
उज्जवल भविष्य
सही दिशा
और हमें
संतुष्टि
8 टिप्पणियां:
धन्यवाद माधव जी
कविता में जेनेरेशन गैप पर अंतर्दृष्टि और संवेदना का अदभुत संगम देखने को मिलता है. ढेरों शुभ कामनाएं.
संवादहीनता.....हर समस्या की जड..........
बिलकुल सही कहा है ..
आवश्कता है
संवादों को पालने की
दोस्ती और प्यार से
जेनेरेशन गैप को
एक दम १६ आने सच.
बहुत सुंदर सोच.
बहुत बढ़िया रचना...एकदम यथार्थ...
बेहतरीन रचना..बधाई
नीरज
bahut badhiya........
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