तुम नहीं
तो ये
बहार, पानी
झरनें, पेड़-पौधे
बेमानी हैं
ये उड़ती तितलियां, घटाएं
चली जाती हैं
मन को
चंचल किये बिना
ये फूल, ये खुशबू
नहीं महकाती जीवन
इंद्रधनुष भी
नहीं भरता रंग
जीवन में
तुम नहीं
तो बेकार है जीवन
तुम्हारे सुरों के बिना
हर गीत है अधूरा
अधूरी सरगम
नहीं करती
कोई गीत पूरा
मेरे लिए
जीवन, गीत
रचना का पर्याय
तुम
मेरा दूसरा ब्लॉग शिकजी को भी अवश्य देखें और उत्साह बढ़ाए
10 टिप्पणियाँ:
ये फूल, ये खुशबू
नहीं महकाती जीवन
इंद्रधनुष भी
नहीं भरता रंग
जीवन में
तुम नहीं
तो बेकार है जीवन
तुम्हारे सुरों के बिना
हर गीत है अधूरा
वाह बहुत ही सुन्दर।
कोई गीत पूरा
मेरे लिए
जीवन, गीत
sundar abhivyakti, badhai
तुम्हारे सुरों के बिना
हर गीत है अधूरा
अधूरी सरगम
नहीं करती
कोई गीत पूरा
सरगम में सुरों का समवेत स्वरूप ही प्रभाव उत्पन्न करता है
सुन्दर रचना
जीवन में रंग तभी भरते हैं जब प्यार हो पति के रूप में या प्यार के रूप में...एक सच...धन्यवाद शोभा जी
सुनील जी धन्यवाद
शुक्रिया वर्माजी
सुंदर कविता है. अच्छा लगा पढ़कर.
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...
अरे वाह आपने तो कमाल का लिखा है.
अच्छा लगा पढ़कर.
बहुत सुन्दर भाव्।
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