रविवार, 11 जुलाई 2010

तुम नहीं तो.....

तुम नहीं
तो ये

बहार, पानी
झरनें, पेड़-पौधे
बेमानी हैं
ये उड़ती तितलियां, घटाएं

चली जाती हैं
मन को

चंचल किये बिना
ये फूल, ये खुशबू
नहीं महकाती जीवन
इंद्रधनुष भी
नहीं भरता रंग
जीवन में
तुम नहीं

तो बेकार है जीवन
तुम्हारे सुरों के बिना
हर गीत है अधूरा
अधूरी सरगम
नहीं करती

कोई गीत पूरा
मेरे लिए
जीवन, गीत

रचना का पर्याय
तुम

मेरा दूसरा ब्लॉग शिकजी को भी अवश्य देखें और उत्साह बढ़ाए

9 टिप्‍पणियां:

शोभा ने कहा…

ये फूल, ये खुशबू
नहीं महकाती जीवन
इंद्रधनुष भी
नहीं भरता रंग
जीवन में
तुम नहीं

तो बेकार है जीवन
तुम्हारे सुरों के बिना
हर गीत है अधूरा
वाह बहुत ही सुन्दर।

Sunil Kumar ने कहा…

कोई गीत पूरा
मेरे लिए
जीवन, गीत

sundar abhivyakti, badhai

M VERMA ने कहा…

तुम्हारे सुरों के बिना
हर गीत है अधूरा
अधूरी सरगम
नहीं करती
कोई गीत पूरा

सरगम में सुरों का समवेत स्वरूप ही प्रभाव उत्पन्न करता है
सुन्दर रचना

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

जीवन में रंग तभी भरते हैं जब प्यार हो पति के रूप में या प्यार के रूप में...एक सच...धन्यवाद शोभा जी

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

सुनील जी धन्यवाद

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

शुक्रिया वर्माजी

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून ने कहा…

सुंदर कविता है. अच्छा लगा पढ़कर.

राजकुमार सोनी ने कहा…

अरे वाह आपने तो कमाल का लिखा है.
अच्छा लगा पढ़कर.

vandana gupta ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव्।